सहरसा: अखिल भारतीय शिक्षा समागम अन्तर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सफल क्रियान्वयन के छह वर्ष पूरे होने के अवसर पर आरएम कॉलेज में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. इंद्रकांत झा और संचालन डॉ. प्रतिभा कपाही ने की। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य डॉ. इंद्रकांत झा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य का निर्माण करने के साथ-साथ उनमें शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं। यह नीति युवाओं को सीमित संसाधनों के बावजूद अपने जीवन के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से प्राप्त करने की कला और कौशल सिखाती है। यह आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत प्राध्यापक डॉ. आशुतोष कुमार झा ने कहा कि शिक्षा नीति 2020 केवल पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारतीय युवाओं को वैचारिक रूप से स्वतंत्र, कर्तव्यनिष्ठ और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाने का एक सशक्त माध्यम है। इस नीति में छात्रों को कार्यवबोध, आत्मज्ञान के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में डॉ. रामानन्द रमण ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के दूरगामी प्रभावों और इसके मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. रमण ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को विशेष रूप से छात्रों के उज्जवल भविष्य और उनके समग्र विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। जिससे उनका व्यवहार कुशल, राष्ट्र और भविष्य के प्रति जागरूकता, स्व व्यावसायिक कौशल का पूर्ण विकास हो सके।
बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिष्ठा कुमारी ने एन ई पी 2020 के मुख्य उद्देश्यों और आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में एन ई पी के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. शुभ्रा पांडे ने एन ई पी को बुनियादी ढांचों में सुधार लाकर इस नीति को लागू करने से और बेहतर परिणाम मिलता। डॉ. प्रतिभा कपाही ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को कम नहीं किया जा सकता है। एनईपी 2020 मातृभाषा और स्थानीय बोलियों को शिक्षा से जोड़कर सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों में नैतिक और विश्लेषणात्मक दृष्टि विकसित करती है।
डॉ. संजय कुमार परमार ने कहा कि एनईपी 2020 के लक्ष्यों के अनुसार छात्रों को समावेशी, कौशल-आधारित और बहुविषयक शिक्षा प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 छात्रों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह भारत की शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करने वाला ढांचा है। डॉ. पंकज कुमार यादव ने कहा कि युवाओं में कौशल विकास से रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एन ई पी 2020 भारत को समृद्ध बनाने में सहायक होगा।
मौके पर डॉ. संजय कुमार, डॉ. अरुण कुमार, डॉ. श्वेता प्रसाद, डॉ. मोनिका कुमारी, डॉ. राम अवधेश, डॉ. डेजी कुमारी, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. कृष्ण कुमार यादव, डॉ. सतीश राज, डॉ. सत्तार आलम, डॉ. सुरुचि चंद्रा, डॉ. लक्ष्मण कुमार, डॉ. आनंद कुमार मिश्र, डॉ. मनीष रंजन सहित अन्य लोग मौजूद थे।।


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