मधेपुरा/बिहार: बीएनएमयू की अंगीभूत इकाई टीपी कॉलेज, मधेपुरा के स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर का स्थानांतरण एलएनएमएस कॉलेज, वीरपुर(सुपौल) कर दिया गया है।
कुलसचिव डॉ अशोक कु. सिंह द्वारा जारी पत्र में इसे कुलपति द्वारा बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 में वर्णित अधिकारी का प्रयोग करते हुए प्रशासनिक दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया गया है। लेकिन जानकारों का मानना है कि डॉ. शेखर द्वारा नवनिर्वाचित सीनेट सदस्य के रूप में शिक्षकों के पक्ष में मुखर होकर आवाज उठाना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बीएस झा को रास नहीं आया। इसके कारण ही उन्हें दंडित करने के उद्देश्य से उनका स्थानांतरण किया गया।
● जून 2017 से हैं असिस्टेंट प्रोफेसर:
मालूम हो कि डॉ.सुधांशु शेखर ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी), पटना के माध्यम से 3 जून, 2017 को टीपी कॉलेज में योगदान दिया था। इसके कुछ ही दिनों बाद अगस्त, 2017 में तत्कालीन कुलपति प्रो. अवध किशोर राय ने जनसंपर्क पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी। इन्होंने विश्वविद्यालय की सकारात्मक छवि बनाने और शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करने में अविस्मरणीय योगदान दिया।
● उपकुलसचिव (अकादमिक) रह चुके हैं:
जुलाई 2020 में तत्कालीन प्रभारी कुलपति प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी ने डॉ. शेखर को जनसंपर्क पदाधिकारी(पीआरओ) के अतिरिक्त उपकुलसचिव (अकादमिक) की भी जिम्मेदारी दी। इन्होंने विश्वविद्यालय के समग्र शैक्षणिक उन्नयन के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए।
● उपकुलसचिव (स्थापना) के रूप में बनाई नई पहचान:
सितंबर 2021 में तत्कालीन कुलपति प्रो. आरके )पी रमण ने डॉ. शेखर को अन्य दायित्वों से मुक्त कर उपकुलसचिव (स्थापना) का नया दायित्व प्रदान किया। यहाँ भी इन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा एवं सूझबूझ से अपनी नई पहचान बनाई। लेकिन वर्तमान कुलपति प्रो. बीएस झा द्वारा किसी मामले में बेवजह कारण-पृच्छा किए जाने के बाद इन्होंने मई 2024 में उपकुलसचिव (स्थापना) के पद से इस्तीफा दे दिया।
फिर, डॉ. शेखर लगभग एक वर्ष तक विश्वविद्यालय प्रशासन से दूर रहे। इसके बाद मई 2025 में साक्षात्कार के माध्यम से इनकी नियुक्ति राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के कार्यक्रम समन्वयक के पद पर हुई। इन्होंने सुस्त पड़ चुके एनएसएस में नई जान फूंक दी। आगे बढ़कर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया और कई नई योजनाएं भी लाने में सफल रहे।
लेकिन, डॉ. शेखर ने कुछ दिनों पूर्व कार्यक्रम समन्वयक (एनएसएस) के पद से इस्तीफा देकर सीनेट चुनाव में नामांकन दाखिल किया था। उनकी अपार बहुमत से जीत मिली। इसके बाद ये शिक्षकों के विभिन्न मुद्दों को लेकर मुखर होकर आवाज उठाने लगे, जिसकी परिणति दंडात्मक स्थानांतरण के रूप में हुई।
● शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में है महती भूमिका:
डॉ. शेखर ने बीएनएमयू में शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महती भूमिका निभाई है। इनके द्वारा विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग और टीपी कॉलेज, मधेपुरा में कई कार्यक्रमों का आयोजन कराया गया। इन्होंने कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार कराया और स्थापना दिवस तथा संस्थापक महामना कीर्ति नारायण मंडल की जयंती एवं पुण्यतिथि को भव्य रूप में आयोजित कराया।
● विभिन्न संगठनों में सक्रिय:
डॉ. शेखर छात्र जीवन से ही विभिन्न शैक्षणिक संगठनों में सक्रिय रहे हैं और हर जगह इन्होंने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। टीपी कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव के रूप में इन्होंने कई अभिनव शुरुआत की। ये दर्शन परिषद् , बिहार के प्रदेश संयुक्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी हैं और अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के सहसचिव भी हैं।
● मिले हैं कई पुरस्कार:
डॉ. शेखर को अखिल भारतीय दर्शन परिषद् द्वारा विजयश्री स्मृति युवा पुरस्कार एवं श्रीमती कमलादेवी जैन स्मृति सर्वेश्रेष्ठ आलेख पुरस्कार सहित कई पुरस्कार प्राप्त हैं। इन्होंने चार पुस्तकों का लेखन एवं दस पुस्तकों का संपादन किया है। ये दो शोध-पत्रिका के संपादक भी हैं। ऐसे शोधोन्मुखी शिक्षक के स्नातकोत्तर कॉलेज से सुदुरवर्ती स्नातक कॉलेज में स्थानांतरण सवालों के घेरे में है।।


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