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गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

"यूएमआईएस पॉर्टल की सीएम से शिकायत"...

मधेपुरा/बिहार: बीएनएमयू, मधेपुरा में यूएमआईएस पॉर्टल को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटनाक्रम में कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी एवं बीएनएमयू के सिंडिकेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर उन्हें यूएमआईएस पॉर्टल प्रकरण की जानकारी दी है। डॉ. सिंह ने इस बाबत मुख्यमंत्री को एक आवेदन भी हस्तगत कराया है। आवेदन में कहा गया है कि बीएनएमयू के कुलपति डॉ. बी. एस. झा की रहनुमाई में खुलेआम लोकधन का दुरूपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में उनके द्वारा गत 10 अप्रैल को राज्यपाल- सह-कुलाधिपति के संज्ञान में सारा तथ्य दे दिया गया है। इसमें मुख्यमंत्री का भी हस्तक्षेप आपेक्षित है। सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने डॉ. सिंह के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने आशा व्यक्त किया है कि राज्यपाल-सह-कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री शीघ्र ही इस मामले पर संज्ञान लेंगे और लोकधन की लूट रूकेगी और पीड़ितों को न्याय भी मिलेगा।
डॉ. सिंह ने बताया कि कुलाधिपति महोदय की अध्यक्षता में राज्य सरकार एवं बिहार के विश्वविद्यालय में कुलपतियों की बैठक में यह निर्देशित किया गया था कि विश्वविद्यालय के नामांकन, पंजीयन, परीक्षा, वेतन, पेंशन सभी कार्य 'भारत सरकार के ऑनलाइन  समर्थ पोर्टल, जो पूर्णतः निःशुल्क है के माध्यम से किया जाए। लेकिन बीएनएमयू में इन आदेशों की अनदेखी कर विश्वविद्यालय प्रशासन एवं यूएमआईएस एजेंसी के गठजोड़ से विश्वविद्यालय से लगभग साढे तीन करोड़ रूपये की वसूली की जा रही है। 
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से प्रति छात्र 248/- रूपये यूएमआईएस एजेंसी लेती है तथा इस उसी यूएमआईएस का एक नुमाइंदा अपना एक अलग एजेंसी यस इन्फोटेक बनाकर कॉलेज से भी सीएमआईएस के नाम पर प्रति छात्र एक सौ रूपया वसूल रहा है। अभी तक लगभग 10-12 करोड़ रूपये है, जो छात्र- छात्राओं से विश्वविद्यालय के साथ-साथ महाविद्यालयों में भी अवैध तरीके से शुल्क के नाम पर एजेंसी द्वारा लिया जा रहा है। 
उन्होंने बताया कि यूएमआईएस कंपनी विश्वविद्यालय के साथ हुए एग्रीमेंट के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है। एग्रीमेंट के अनुरूप सत्रह मॉड्यूल्स पर कार्य करना है, लेकिन मात्र तीन ही मॉड्युल्स पर कार्य हो रहा है। यह कार्य भी संतोषप्रद नहीं है। सबसे मुख्य बात यह है कि कंपनी विश्वविद्यालय से लाखों रुपए का उपस्कर आदि लें रही है और छात्र-छात्राओं से संबंधित डाटा भी एजेंसी के हाथ में सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने बताया कि यूएमआईएस एजेंसी को सिंडिकेट के निर्णय के आलोक में मात्र एक वर्ष के लिए करार था। इस करार की अवधि 19 अप्रैल 2025 को ही समाप्त हो गई है। लेकिन इसके बाद भी यूएमआईएस कंपनी से अवैध रूप से कार्य कराया जा रहा है। यूएमआईएस कंपनी को अवैध भुगतान को लेकर चल रहे गतिरोध के कारण ही गत माह एक साथ कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी एवं परीक्षा नियंत्रक  को बदल दिया गया। 
उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन यूएमआईएस को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझ समर्थ पोर्टल को अपडेट नहीं कर रहा है। इसी की बानगी है कि यूएमआईएस इंचार्ज ने समर्थ पोर्टल के तत्कालीन नोडल पदाधिकारी शशिकांत कुमार को धमकी दी। कुलसचिव ने यूएमआईएस इंचार्ज पर कोई कार्रवाई नहीं की, उल्टे शशिकांत कुमार का स्थानांतरण उनके पैतृक महाविद्यालय से सौ किलोमीटर दूर वीरपुर कर दिया गया। यूएमआईएस के खिलाफ एवं पीड़ित शिक्षक का पक्ष में आवेदन देने पर नवनिर्वाचित सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर, जो अपने विषय के दूसरे वरिष्ठ शिक्षक हैं का भी स्नातकोत्तर महाविद्यालय से सुदुरवर्ती स्नातक महाविद्यालय में कर दिया गया।।

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