मधेपुरा/बिहार: भारत सरकार के अधीन संस्कृति मंत्रालय के साहित्य अकादमी पटना में आयोजित परिसंवाद में आरएम कॉलेज सहरसा कि अस्सिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुमारी अपर्णा का व्याख्यान हुआ।
साहित्य अकादमी पटना और चेतना समिति, पटना के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित परिसंवाद में बीएनएमयू मधेपुरा की अंगीभूत इकाई आरएम कॉलेज सहरसा में हिंदी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुमारी अपर्णा ने 'कीर्ति नारायण मिश्र आ आखरक माध्यम स हुनक योगदान' विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रण मिलने पर विश्वविद्यालय और कॉलेज में खुशी व्याप्त है।
डॉ. कुमारी अपर्णा ने अपने व्याख्यान में मैथिली को आमजन की मनःस्थिति की रचना बताया। उन्होंने कहा कि कीर्ति नारायण मिश्र को 'मैथिली की समृद्धि में योगदान' के लिए 1997 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। उन्होंने आखर पत्रिका के प्रकाशन मैथिली जगत को शीर्ष पर पहुंचने में सहयोगी बताया। डॉ. अपर्णा ने मैथिली के अस्तित्व को और आगे बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि मैथिली को तोड़ने का प्रयास किया गया लेकिन यह अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने में सफल रहा। मैथिली को भारतीय संविधान के अष्टम सूची में शामिल करने में कीर्ति नारायण मिश्र का अहम योगदान रहा। उन्होंने मैथिली के विकास के लिए बिहार में इसे द्वितीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मैथिली में गद्य, पद्य, व्याकरण, आलोचना को समृद्ध कर विशाल पुस्तकालय स्थापित करने की मांग की। इसे तकनीकी तौर पर भी सशक्त करने की बात कही। उन्होंने बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में मैथिली की पढ़ाई करने की मांग की। परिसंवाद की अध्यक्षता प्रख्यात मैथिली लेखक अशोक ने की।
मौके पर उमेश मिश्र, साहित्य अकादमी के उप सचिव एन सुरेन्द्र बाबू, रामानंद झा रमण सहित कई गणमान्य मौजूद थे। डॉ. कुमारी अपर्णा को साहित्य अकादमी में आयोजित परिसंवाद में व्याख्यान देने पर प्रधानाचार्य प्रो. गुलरेज रौशन रहमान, पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. ललित नारायण मिश्र, डॉ. कविता कुमारी, डॉ. शुभ्रा पांडे, डॉ. अमीष कुमार डॉ. रामानंद रमण, डॉ. प्रतिभा कपाही, डॉ. पिंकी कुमारी, डॉ. प्रीति कुमारी, डॉ. सुरेश प्रियदर्शी, डॉ. संजय परमार, डॉ. लक्ष्मण कुमार सहित अन्य ने बधाई दी है।।


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