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मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

कैम्पस:"बीएनएमयू में गेस्ट फैकल्टी के लिए पीएच.डी. करना अब हुआ मुश्किल"...

● Dr. Sarang Tanay@Madhepura.
मधेपुरा/बिहार: भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय ने पीएच.डी. शोध कार्य को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय के ज्ञापांक- जीएस(डीआरए-09/24)-1074/2024 दिनांक-18/10/2024 की पूर्व/हालिया अधिसूचनाओं के अनुसार अब अतिथि सहायक प्राध्यापक/गेस्ट फैकल्टी को पीएच.डी. करने के लिए अपने पद से अनिवार्य रूप से इस्तीफा/रिजाइन देना होगा।
 बिना त्यागपत्र दिए गेस्ट टीचर(अतिथि शिक्षक) का पीएच.डी. कोर्स वर्क या शोध में नामांकन संभव नहीं होगा।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी पीएच.डी. शोध विनियम-2016 (संशोधित 2018) के अंतर्गत निर्देश-(iv) में स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक को शोध कार्य हेतु कोर्स वर्क में नामांकन लेने से पहले पद से त्यागपत्र देना होगा तथा संबंधित विभाग/महाविद्यालय से त्यागपत्र की स्वीकृति की प्रति विश्वविद्यालय में जमा करनी होगी। यह प्रावधान अधिसूचना की तिथि से ही प्रभावी माना गया है। और यह अधिसूचना पैट-19 और पैट-20 में शोधरत शोधार्थी के संदर्भ में शोधरत शोधार्थियों के संदर्भ में भी उपरोक्त निदेश शोध कार्य की शेष अवधि के लिए लागू माना जाएगा।
इसी क्रम में गत दिनों विद्वत् परिषद्(एकेडमिक कॉउन्सिल) की बैठक (दिनांक 19.11.2025) के निर्णय के आलोक में विश्वविद्यालय ने 23 दिसम्बर 2025 एक नई अधिसूचना जारी करते हुए सभी विभागाध्यक्षों(एचओडी) और प्रधानाचार्यों से यह निर्देशित किया है कि पीएच.डी. में नामांकित ऐसे सभी अतिथि सहायक प्राध्यापक/प्राध्यापिकाओं की समेकित सूची 05 जनवरी 2026 तक उपकुलसचिव (शैक्षणिक) कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।
 इससे यह साफ हो गया है कि विश्वविद्यालय अब गेस्ट फैकल्टी और पीएच.डी. शोधार्थी की स्थिति को लेकर किसी प्रकार की ढील/छूट नहीं देना चाहता।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। वर्षों से पढ़ा रहे गेस्ट फैकल्टी के सामने अब रोज़गार छोड़कर पीएच.डी. करने या पीएच.डी. छोड़कर गेस्ट फैकल्टी बने रहने की कठिन चुनौती खड़ी हो गई है। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय शोध के इच्छुक अतिथि शिक्षकों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न करेगा।
हालाँकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि यह व्यवस्था यूजीसी एवं विश्वविद्यालय के शोध विनियमों के अनुरूप है और शोध कार्य में पूर्णकालिक संलग्नता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।।

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