● Dr. Sarang Tanay@Madhepura.
मधेपुरा/बिहार: विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों के शोध कार्य से संबंधित अनुमोदित सिनॉप्सिस (शोध-प्रारूप) को शोध गंगोत्री पोर्टल पर अपलोड किए जाने की प्रक्रिया निष्पादन हेतु विश्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग के पूर्व एचओडी प्रो. एम.आई. रहमान को "शोध गंगोत्री" का विश्वविद्यालय कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया है।
इस बाबत में कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार ठाकुर ने अधिसूचना जारी कर दी है।
प्रो. रहमान ने बताया कि शोध गंगा भारत का राष्ट्रीय शोध-पत्र संग्रह है जिसमें पूर्ण पीएचडी थीसिस और शोध सारांश संग्रहित हैं, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग( यूजीसी),नई दिल्ली द्वारा सार्वजनिक पहुंच के लिए अनिवार्य किया गया है।
वहीं, शोध गंगोत्री एक पूर्ववर्ती मंच है जो चल रहे पीएचडी सिनॉप्सिस(शोध प्रारूप) को संग्रहित करता है, जिससे दोहराव को रोका जा सके और शोध(रिसर्च) के रुझान प्रदर्शित किए जा सकें। इसके लिंक 'शोध गंगा' में प्रकाशित अंतिम थीसिस से जुड़े होते हैं। शोध गंगोत्री को उस 'स्रोत' के रूप में सोचें ( जैसे गंगोत्री ग्लेशियर गंगा नदी को पानी देता है) जहाँ से शोध के विचार उत्पन्न होते हैं, जो शोधगंगा में ज्ञान की पूरी "नदी" का प्रवाह करते हैं।
उन्होंने बताया कि शोध गंगोत्री एवं शोधगंगा में अंतर है। शोध गंगोत्री विचार (सारांश) प्रस्तुत करता है, जबकि शोधगंगा अंतिम उत्पाद (थीसिस) प्रस्तुत करता है। शोध गंगोत्री शोध के पूरा होने से पहले ही उसे दृश्यता प्रदान करके, भारतीय उच्च शिक्षा में सहयोग और पारदर्शिता को बढ़ावा देकर शोधगंगा का पूरक है।
मालूम हो कि प्रो. रहमान संप्रति विश्वविद्यालय प्लेगरिज़्म सेन्टर, 'शोध शुद्धि' और 'शोधगंगा' के भी विश्वविद्यालय कॉर्डिनेटर एवं पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च कॉउन्सिल(पीजीआरसी) के सदस्य हैं। इसके पूर्व वे उपकुलसचिव (अकादमिक) एवं निदेशक (अकादमिक) के रूप में भी सफलतापूर्वक कार्य कर चुके हैं।
प्रो. रहमान विश्वविद्यालय में एक विद्वान प्रोफेसर एवं मनोवैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हैं।
प्रो रहमान को शोध गंगोत्री का विश्वविद्यालय कॉर्डिनेटर
बनाने पर कई शिक्षक,शोधार्थी व स्टूडेंट्स सहित अन्य ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।।


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