बिट्टू कु. यदुवंशी
बीएन मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत टीपी कॉलेज के बीएड फर्जी नामांकन प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में 2 महीने बाद तैयार जांच रिपोर्ट में कॉलेज से लेकर विवि तक कई बड़े पदाधिकारियों के नाम आने से कार्रवाई को लेकर विवि प्रशासन दुविधा में पड़ गई है। जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया सबकी संलिप्ता सामने आयी है। खासकर टीपी कॉलेज के कई शिक्षक इसमें शामिल है। इस रिपोर्ट के आधार पर छात्रा का नामांकन रद्द होना तय माना जा रहा है। जांच में दोषियों को चिन्हित कर रिपोर्ट प्रतिकुलपति को सौंप दिया गया है। वहीं कुलपति के राजभवन से लौटने के साथ ही कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसमें 3 से 4 शिक्षकों पर कार्रवाई होने की संभावना व्यक्त की गई है। ज्ञात हो कि टीपी कॉलेज में सामान्य वर्ग की छात्रा का नामांकन एससी कोटे में कर लिया गया। इस मामले को उजागर कर कार्रवाई के लिए अभाविप ने महामहिम कुलाधिपति को पत्र लिखा था।
अभाविप कार्यकर्ताओं ने साक्ष्य के साथ कुलपति के नाम 13 पेज का आवेदन सौंप कर मामले को नया दे दिया है। इसके बाद कार्रवाई को लेकर विवि प्रशासन माथापच्ची कर रही है। विवि सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जांच में टीपी कॉलेज के बीएड नामांकन कमेटी में शामिल पदाधिकारी व शिक्षकों को दोषी पाया गया है। अभाविप के खुलासे से कॉलेज के और कई पदाधिकारी पर गाज गिर सकती है। ज्ञात हो कि इस मामले में राजभवन तक विवि को फजीहत का सामना करना पड़ा है। राजभवन ने मामले में सज्ञान लेते हुए विवि से रिपोर्ट तलब किया था।
इस मामले में विवि के कुलानुशासक डॉ अरूण कुमार यादव ने सबसे पहले टीपी कॉलेज के प्राचार्य, बीएड के समन्वयक एवं छात्रा से स्पष्टीकरण पूछा था। स्पष्टीकरण का जवाब मिलने के बाद कुलानुशासक के छूट्टी पर जाने से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। छूट्टी से लौटने के साथ ही कुलानुशासक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट प्रोवीसी को समर्पित कर दिया। प्रोवीसी ने रिपोर्ट के हरेक बिंदूओं पर गहन जांच- पड़ताल कर दोषी व्यक्ति को चिन्हित कर लिया है। वहीं कहा गया है कि सबसे पहले छात्रा का नामांकन रद्द होगा। इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बीएड फर्जीवाड़ा मामले में अंतिम निर्णय कुलपति को लेना है। कुलपति सोमवार को राजभवन से विवि लौट गए हैं।
बीएड नामांकन फर्जीवाड़े मामले में 2 महीने तक कार्रवाई नहीं होने पर विवि प्रशासन को फजीहत का सामना करना पड़ा है। मामले में खुलासे के बाद अभाविप ने विवि प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 23 मार्च को ही सभी साक्ष्यों के साथ कुलपति को आवेदन दिया गया था। इस पर पहले कुलपति ने 31 मार्च तक ही कार्रवाई की बात कही थी। लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नही की जा सकी है। अभाविप ने कहा कि बीएड के इस फर्जीवाड़े में 5 से 10 लाख रूपए तक की वसूली करके बंदरबांट किया गया है।
टीपी कॉलेज के बीएड फर्जी नामांकन मामले में जांच रिपोर्ट तैयार है। रिपोर्ट के आधार पर बीएड में छात्रा का नामांकन रद्द होना है। दोषियों को चिन्हित कर लिया गया है, कार्रवाई भी तय है। कुलपति के राजभवन से मुख्यालय लौटने के पर कार्रवाई की अग्रतर प्रक्रिया अपनायी जाएगी।
प्रो डॉ फारूक अली, प्रतिकुलपति, बीएनएमयू
बीएन मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत टीपी कॉलेज के बीएड फर्जी नामांकन प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। इस मामले में 2 महीने बाद तैयार जांच रिपोर्ट में कॉलेज से लेकर विवि तक कई बड़े पदाधिकारियों के नाम आने से कार्रवाई को लेकर विवि प्रशासन दुविधा में पड़ गई है। जांच रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया सबकी संलिप्ता सामने आयी है। खासकर टीपी कॉलेज के कई शिक्षक इसमें शामिल है। इस रिपोर्ट के आधार पर छात्रा का नामांकन रद्द होना तय माना जा रहा है। जांच में दोषियों को चिन्हित कर रिपोर्ट प्रतिकुलपति को सौंप दिया गया है। वहीं कुलपति के राजभवन से लौटने के साथ ही कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसमें 3 से 4 शिक्षकों पर कार्रवाई होने की संभावना व्यक्त की गई है। ज्ञात हो कि टीपी कॉलेज में सामान्य वर्ग की छात्रा का नामांकन एससी कोटे में कर लिया गया। इस मामले को उजागर कर कार्रवाई के लिए अभाविप ने महामहिम कुलाधिपति को पत्र लिखा था।
अभाविप कार्यकर्ताओं ने साक्ष्य के साथ कुलपति के नाम 13 पेज का आवेदन सौंप कर मामले को नया दे दिया है। इसके बाद कार्रवाई को लेकर विवि प्रशासन माथापच्ची कर रही है। विवि सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जांच में टीपी कॉलेज के बीएड नामांकन कमेटी में शामिल पदाधिकारी व शिक्षकों को दोषी पाया गया है। अभाविप के खुलासे से कॉलेज के और कई पदाधिकारी पर गाज गिर सकती है। ज्ञात हो कि इस मामले में राजभवन तक विवि को फजीहत का सामना करना पड़ा है। राजभवन ने मामले में सज्ञान लेते हुए विवि से रिपोर्ट तलब किया था।
इस मामले में विवि के कुलानुशासक डॉ अरूण कुमार यादव ने सबसे पहले टीपी कॉलेज के प्राचार्य, बीएड के समन्वयक एवं छात्रा से स्पष्टीकरण पूछा था। स्पष्टीकरण का जवाब मिलने के बाद कुलानुशासक के छूट्टी पर जाने से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। छूट्टी से लौटने के साथ ही कुलानुशासक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिपोर्ट प्रोवीसी को समर्पित कर दिया। प्रोवीसी ने रिपोर्ट के हरेक बिंदूओं पर गहन जांच- पड़ताल कर दोषी व्यक्ति को चिन्हित कर लिया है। वहीं कहा गया है कि सबसे पहले छात्रा का नामांकन रद्द होगा। इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बीएड फर्जीवाड़ा मामले में अंतिम निर्णय कुलपति को लेना है। कुलपति सोमवार को राजभवन से विवि लौट गए हैं।
बीएड नामांकन फर्जीवाड़े मामले में 2 महीने तक कार्रवाई नहीं होने पर विवि प्रशासन को फजीहत का सामना करना पड़ा है। मामले में खुलासे के बाद अभाविप ने विवि प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 23 मार्च को ही सभी साक्ष्यों के साथ कुलपति को आवेदन दिया गया था। इस पर पहले कुलपति ने 31 मार्च तक ही कार्रवाई की बात कही थी। लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नही की जा सकी है। अभाविप ने कहा कि बीएड के इस फर्जीवाड़े में 5 से 10 लाख रूपए तक की वसूली करके बंदरबांट किया गया है।
टीपी कॉलेज के बीएड फर्जी नामांकन मामले में जांच रिपोर्ट तैयार है। रिपोर्ट के आधार पर बीएड में छात्रा का नामांकन रद्द होना है। दोषियों को चिन्हित कर लिया गया है, कार्रवाई भी तय है। कुलपति के राजभवन से मुख्यालय लौटने के पर कार्रवाई की अग्रतर प्रक्रिया अपनायी जाएगी।
प्रो डॉ फारूक अली, प्रतिकुलपति, बीएनएमयू



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