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सोमवार, 4 जून 2018

बीएनएमयू के कुलपति फर्जी तरीके से बहाल हुए कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव को बचाने का कर रहे प्रयास, एनएसयूआई करेगी आंदोलन

एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष व पार्वती विज्ञान महाविद्यालय कौंसिल मेंबर निशांत यादव ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि बीएनएमयू में एकबार फिर भ्रष्ट और फर्जी पदाधिकारी आपसी बंदरबाँट कर बीएनएमयू की अस्मिता को बदनाम और दागदार कर रहे हैं ।

छात्र-छात्राओं के लिये प्रवेश, परीक्षा और परिणाम का कोई चर्चा नहीं है ।

जिलाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव इस्तीफा देकर खुद को बचाने का प्रयास कर रहे हैं ।जिन्हें हम कभी कामयाब नहीं होने देंगे । म
उन्होंने कहा कि कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव के बहाली में हुई फर्जीवाड़े का जब एनएसयूआई ने पर्दाफाश किया और विवि प्रशाषन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर फर्जी कुलसचिव नरेंद्र जंगबहादुर उर्फ़ नरेंद्र श्रीवास्तव पर कार्यवाई करने की मांग रखा तो बीएनएमयू कुलपति ने सबूतों को झुठलाने और छात्रनेताओं को बलगलाने का पुरजोड़ कोशिस किए लेकिन आज सच्चाई सामने आ रही है ।
निशांत ने कहा कि कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव सामान्य श्रेणी से आते है लेकिन इन्होंने बहाली के दौरान कमीशन को अपना नाम नरेंद्र जंगबहादुर बता और फर्जी BC-1के जाति प्रमाण- पत्र का सहारा लेकर कमीशन व विवि को धोखा देकर आरक्षित कोटे से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर बहाल हुए ।
समय-समय पर इनके विरूद्ध आवाज उठाई गई लेकिन तत्कालीन कुलपति और कुलसचिव के द्वारा इन्हें सही ठहराया गया ।




साथ ही नरेंद्र श्रीवास्तव ने 2010 में एक फर्जी शुद्धिपत्र  कुलपति और कुलसचिव के सहयोग से जारी किया । जिसमें उच्यन्यायलय  के फर्जी न्यायदेशो का हवाला देकर खुद को न्यायालय द्वारा सही ठहराने की कोशिश की गई ।
एनएसयूआई ने जब इसका खुलासा किया तो बीएनएमयू कुलपति ने एक गुपचुप जाँच कमिटी से जाँच करवाकर नरेंद्र श्रीवास्तव को सही ठहरा दिए ।
ये जाँच रिपोर्ट न छात्रनेताओं को दिया गया और न ही मिडिया को ।
इससे साफ प्रतीत होता है कि विवि में चल रहे बहुत बड़े गोरखधंधे को झुठलाने और दबाने का प्रयास किया जा रहा है । जिसमे विवि के तमाम उच्य पदाधिकारी भी शामिल है । निशांत यादव ने कहा कि
आदरणीय कुलपति अवध किशोर राय से एनएसयूआई माँग करती है कुलसचिव नरेंद्र श्रीवास्तव पर जल्द से जल्द कठोर कार्यवाई करे ताकि भविष्य में भ्रष्ट और फर्जी पदाधिकारियों के लिये सबक हो अन्यथा एक बहुत बड़े और उग्र आंदोलन करने के लिये एनएसयूआई बाध्य होगी, जिनके जिम्मेवार विवि. प्रशासन व कुलपति होंगे ।

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