मनुष्य को कुदरत से मिले तमाम तोहफों में एक हौसला ही ऐसा खास तोहफ़ा है जो जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने की ताकत रखता है। बुलंद हौसले और जुनून के आगे कोई भी सीमा अहमियत नहीं रखती, इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है हमारी आज की कहानी के हीरो ने।असम की 17 साल की जेबीन कौसर की कहानी अदम्य हौसले की एक अनूठी मिसाल है। उसने पैरों से लिखकर 10वीं बोर्ड की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। अपने आस-पास उपहास और घृणा का पात्र बनने वाली इस प्रतिभाशाली बच्ची ने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और इसे ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर कामयाबी की कहानी लिखडाली।
पैरों से लिखकर पास की 10वीं बोर्ड की परीक्षा
असम के होज़ाई ज़िले के छोटे से गाँव में रहने वाली जेबीन कौसर किसी करिश्माई लड़की से कम नहीं है। उन्होंने इस साल 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 60 प्रतिशत अंकों के साथ अपने पैरों से लिख कर पास की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाली जेबीन के पिता किराए पर ऑटो चलाते हैं जिससे महीने की कमाई 5000 रुपये तक होती है और उससे ही परिवार का खर्च चलता है। ऐसे में जब जेबीन का जन्म बिना हाथों के हुआ था, तब परिवार को मानो गहरा आघात लगा। लेकिन कहते हैं न समय हर जख़्म को भर देता है। जबीन ने भी बिना हाथों के जीना सीख लिया और उन्होंने कभी इसे अपनी कमी नहीं बनने दी। परिवार का साथ मिला और जबीन अपने हौसलों के दम पर आगे बढ़ने लगी। मगर उन्होंने कभी इसे अपनी कमज़ोरी नहीं माना। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार जबीन ने अपनी हिम्मत और मज़बूत इच्छा शक्ति के बल पर 10वीं की परीक्षा फ़र्स्ट डिविज़न से पास की। प्रिंसिपल और साथियों का मिला सहयोग ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली जेबीन सिर्फ एक होनहार विद्यार्थी नहीं है बल्कि वो एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी लड़की भी हैं। चाहे बर्तन उठाना हो या फिर स्कूल का बैग वो बिना किसी सहारे के सारे काम खुद ही कर लेती है।अपनी स्कूल के छात्रा पर नाज़ करने वाली उसकी प्रिंसिपल अफ़साना बेगम चौधरी बताती हैं कि -
” हमारे स्कूल में 17 साल बाद बोर्ड की परीक्षा में छात्रों ने फ़र्स्ट डिविज़न हासिल किए हैं। हमें सभी छात्रों पर नाज़ है,ख़ासकर हमारी जेबीन पर। हमने कभी उसे अपने से अलग नहीं समझा क्योंकि वो अलग है ही नहीं।”
उसके हौसले को परवाज देने के लिए स्कूल ने की एकशानदार पहल
अपनी स्टूडेंट के हौसलों को परवाज़ देने के लिए और आगे आने वाले विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिए जेबीन के स्कूल प्रशासन ने निर्णय लिया है कि सभी स्टूडेंट्स के आईडी कार्ड्स के पीछे जेबीन की पैर से लिखती हुई तस्वीर लगाई जाए, जो आने वाले पीढ़ी के लिए हिम्मत और हौसलों की मिसाल पेश करेगी।अपनी बेटी जेबीन की सफलता पर उनके माता-पिता बेहद खुश हैं लेकिन अब अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित भी हैं।
जेबीन बताती है कि
“मैं बहुत खुश हूँ और इसी तरह मेहनत करती रहूंगी आगे बढ़ती रहूँगी। मुझे पढ़ाई के अलावा घूमना बहुत पसन्द है और मैं एक बार मुम्बई की सैर करना चाहती हूँ।”
जेबीन अपनी आगे की पढ़ाई अब मरियम अजमल कॉलेज से करना चाहती हैं। उनका सपना है कि वो एक बहुत अच्छी टीचर बनें।बिना हाथों के भी मन को हौसलों से लबरेज़ रखने वाली जेबीन को शायद ही कोई हो जो आगे बढ़ने से रोक पाये क्योंकि वाक़ई वो हौसलों से ही उड़ान भरती है।
पैरों से लिखकर पास की 10वीं बोर्ड की परीक्षा
असम के होज़ाई ज़िले के छोटे से गाँव में रहने वाली जेबीन कौसर किसी करिश्माई लड़की से कम नहीं है। उन्होंने इस साल 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 60 प्रतिशत अंकों के साथ अपने पैरों से लिख कर पास की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाली जेबीन के पिता किराए पर ऑटो चलाते हैं जिससे महीने की कमाई 5000 रुपये तक होती है और उससे ही परिवार का खर्च चलता है। ऐसे में जब जेबीन का जन्म बिना हाथों के हुआ था, तब परिवार को मानो गहरा आघात लगा। लेकिन कहते हैं न समय हर जख़्म को भर देता है। जबीन ने भी बिना हाथों के जीना सीख लिया और उन्होंने कभी इसे अपनी कमी नहीं बनने दी। परिवार का साथ मिला और जबीन अपने हौसलों के दम पर आगे बढ़ने लगी। मगर उन्होंने कभी इसे अपनी कमज़ोरी नहीं माना। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार जबीन ने अपनी हिम्मत और मज़बूत इच्छा शक्ति के बल पर 10वीं की परीक्षा फ़र्स्ट डिविज़न से पास की। प्रिंसिपल और साथियों का मिला सहयोग ज्ञान ज्योति पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली जेबीन सिर्फ एक होनहार विद्यार्थी नहीं है बल्कि वो एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी लड़की भी हैं। चाहे बर्तन उठाना हो या फिर स्कूल का बैग वो बिना किसी सहारे के सारे काम खुद ही कर लेती है।अपनी स्कूल के छात्रा पर नाज़ करने वाली उसकी प्रिंसिपल अफ़साना बेगम चौधरी बताती हैं कि -
” हमारे स्कूल में 17 साल बाद बोर्ड की परीक्षा में छात्रों ने फ़र्स्ट डिविज़न हासिल किए हैं। हमें सभी छात्रों पर नाज़ है,ख़ासकर हमारी जेबीन पर। हमने कभी उसे अपने से अलग नहीं समझा क्योंकि वो अलग है ही नहीं।”
उसके हौसले को परवाज देने के लिए स्कूल ने की एकशानदार पहल
अपनी स्टूडेंट के हौसलों को परवाज़ देने के लिए और आगे आने वाले विद्यार्थियों को प्रेरणा देने के लिए जेबीन के स्कूल प्रशासन ने निर्णय लिया है कि सभी स्टूडेंट्स के आईडी कार्ड्स के पीछे जेबीन की पैर से लिखती हुई तस्वीर लगाई जाए, जो आने वाले पीढ़ी के लिए हिम्मत और हौसलों की मिसाल पेश करेगी।अपनी बेटी जेबीन की सफलता पर उनके माता-पिता बेहद खुश हैं लेकिन अब अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित भी हैं।
जेबीन बताती है कि
“मैं बहुत खुश हूँ और इसी तरह मेहनत करती रहूंगी आगे बढ़ती रहूँगी। मुझे पढ़ाई के अलावा घूमना बहुत पसन्द है और मैं एक बार मुम्बई की सैर करना चाहती हूँ।”
जेबीन अपनी आगे की पढ़ाई अब मरियम अजमल कॉलेज से करना चाहती हैं। उनका सपना है कि वो एक बहुत अच्छी टीचर बनें।बिना हाथों के भी मन को हौसलों से लबरेज़ रखने वाली जेबीन को शायद ही कोई हो जो आगे बढ़ने से रोक पाये क्योंकि वाक़ई वो हौसलों से ही उड़ान भरती है।




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