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मंगलवार, 22 मई 2018

"तस्वीर" अतुल कुमार अनजान की बेहतरीन कविता आप भी पढ़ें.....

तस्वीर

पिछले कुछ दिनों से
मैं भावनाओं के
कैनवास पर
बनाना चाहता हूं
तुम्हारा तस्वीर.

शायद मैं कलाकार
नहीं हूं
कोई एक तस्वीर
मुझसे नहीं बनता
अनगिन चेहरे
उभर आते हैं
नहीं बन पाता
कोई एक मुकम्मल
जो तुम्हें
परिभाषित करें.

शायद दोस है
मनका
जिधर देखता हूं
अजनबी चेहरे में
लगता है तुम हो
और वह शख्स
लग जाता है
जाना पहचाना.

क्या बताऊं
इस दरमियान
बहुत बेचैन रहता हूं
अब तुम ही बताओ
इतनी बेचैनी में मैं
कैसे रह पाऊंगा.

अरे यह सब
मैं क्या बोल रहा हूं
तुमसे
तुम तो संगदिल हो
नहीं नहीं
माफ करना मुझे
तुझे यह सब नहीं
कहना चाहिए मुझे.

मैं तेरा होता कौन हूं?
जो कुछ से कुछ कह दूं.

तुम कुछ भी
संबोधन कर देना
पर मैं
अब भी बना रहा हूं
तुम्हारी छवि
बैठे- बैठे.

मुझे आभास होता है
मैं कलाकारीता के
इस जगत में
कामयाब नहीं हो पाऊंगा

रुको -रुको
लो देखो
यह भी तो
एक तस्वीर है.





अतुल मल्लिक "अनजान"
संस्थापक संयोजक
देहाती साहित्यिक परिषद
"देहाती कुटीर" ग्राम -जगन्नाथपुर, पोस्ट -बनेली,जिला -पूर्णिया

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