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शुक्रवार, 25 मई 2018

बीएनएमयू की करतूत से आहत प्रिंसपल ने किया आत्महत्या का प्रयास, विवि ने दोषी प्रॉक्टर को बचाया, निर्दोष प्राचार्य को फंसाया

संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत आरएम कॉलेज सहरसा के प्राक्टर प्राचार्य विवाद में शुक्रवार को विवि की कार्रवाई से आहत प्राचार्य डॉ आरबी झा ने अपना सिर फोड़ने का प्रयास किया। वहीं दूसरी तरफ आर झा महिला कॉलेज में एक कार्यक्रम में भाग लेने गए कुलपति को विभिन्न संगठनों के आक्रोशित छात्रों ने घेर लिया। मौके पर छात्र विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्राचार्य पर हुई कार्रवाई को वापस लेने की मांग छात्र कर रहे थे। इस दौरान कुलपति के सामने छात्र धरना पर बैठ गए।  कॉलेज में स्थिति अनियंत्रित होने पर डीएसपी के साथ भारी संख्या में पहुंची पुलिस ने छात्रों को नियंत्रित किया। मौके पर कुलपति ने कहा कि वरीयता के आधार पर डॉ अनिलकांत मिश्र आरएम कॉलेज सहरसा के प्राचार्य होंगे। इस पर छात्र मानने को तैयान नहीं हुए और वे हंगामा करने लग। लेकिन जब प्राचार्य को जबरन छूट्‌टी पर भेजे जाने की आदेश को कुलपति ने वापस लेने का आश्वासन दिया तो छात्रों को आक्रोश शंात हुआ।



इससे पहले बता दे कि आरएम कॉलेज सहरसा में 6 जनवरी को बीएड में बेटे के नामांकन को लेकर प्राचार्य के साथ धक्का-मुक्की करने वाले कुलानुशासक को विवि से क्लीन चिट मिल गई। वहीं विवि ने कॉलेज में वरीयता के आधार पर प्राचार्य डॉ आरबी झा को पद से हटाते हुए जबरन छूट्‌टी पर भेज दिया। इस संबंध में शुक्रवार को कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय के निर्देश पर प्रभारी कुलसचिव डॉ शैलेंद्र कुमार द्वारा अलग-अलग अधिसूचना व पत्र जारी किया गया।
शुक्रवार को मामले में हुई गुप्त कार्रवाई को विवि ने सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया। लेकिन शुक्रवार को विवि के निर्देशानुसार पद से विमुक्त होकर कुलानुशासक अपने पैतृक आरएम कॉलेज सहरसा में योगदान देने गए तो वहां यह बातें खुल कर सामने आ गई। इधर, विभिन्न संगठनों ने बिना पारदर्शी तरीके से निर्दोष प्राचार्य को बेवजह पद से हटाने व जबरन छूट्‌टी पर भेजने के निर्णय की घोर निंदा की है। वहीं आरएम कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ आरबी झा ने विवि के इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय पटना जाने की बात कही।
6 जनवरी को आरएम कॉलेज सहरसा में प्रतिकुलपति प्रो डा फारूक अली के निर्देश पर विवि के कुलानुशासक डा अरविंद कुमार अपने बेटे के बीएड में नामांकन को लेकर कॉलेज के प्राचार्य डा आरबी झा के साथ धक्का मुक्की करते हुए देख लेने की धमकी भी दी थी। जबकि 7 जनवरी को इस घटना का वीडियो वायरल होने पर 8 जनवरी को ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित विवि प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया था। इस पर विवि ने जांच की प्रक्रिया शुरू करते हुए कुलानुशासक को जबरन छूट्‌टी पर भेज दिया था।
3 जनवरी को प्रोवीसी प्रो डा फारूक अली ने आरएम कॉलेज के प्राचार्य को पत्र जारी कर सत्र 2017-18 में यूआर कोटि के रिक्त स्थान पर कुलानुशासक के बेटे का नामांकन लेने का निर्देश दिया था। लेकिन यूआर कोटि में कट ऑफ मार्क्स से काफी कम नंबर होने के कारण प्राचार्य ने नामांकन लेने से इंकार कर दिया। इस िववाद पर विवि ने 110 दिनों बाद कार्रवाई करते हुए कुलानुशासक के 65 दिनों के फोर्स लीव को अर्जित अवकाश में तब्दील करते हुए उन्हें पैतृक कॉलेज वापस भेज दिया। इस संबंध में विवि द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अनुशासन समिति के निर्णय के आलोक में कुलानुशासक को पद से विमुक्त करते हुए पैतृक कॉलेज भेजा गया है।
आरएम कॉलेज के बीएड प्रकरण में हुए कार्रवाई को लेकर विवि प्रशासन सवालों के घेरे में है। अब सबकी नजर टीपी कॉलेज के फर्जी बीएड नामांकन मामले पर टिकी हुई है। छात्रों को आशंका होने लगा है कि कहीं आरएम कॉलेज की तरह ही विवि प्रशासन टीपी कॉलेज के फर्जी बीएड नामांकन मामले में दोषी को आरोपमुक्त ना कर दे।
विवि ने डीएसडब्लयू सह सीसीडीसी डॉ अनिलकांत मिश्रा का प्रतिनियोजन विश्वविद्यालय मुख्यालय से तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए डॉ मिश्र की सेवा उनके पैतृक आरएम कॉलेज सहरसा को वापस करते हुए प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपा है। इस संबंध में विवि ने अधिसूचना जारी कर दी है।
बीएड प्रकरण में अनुशासन समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में कार्रवाई की गई है। कॉलेज के प्राचार्य को वरीययता के आधार पर हटा कर वरीय शिक्षक को प्रभार दिया गया है। प्रभार के क्रम में विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न ना हो इसके लिए प्राचार्य डॉ आरबी झा को जबरन छूट्‌टी पर भेजा गया है।
प्रो डॉ फारूक अली, प्रति
कुलपति, बीएनएमयू


कॉलेज के किसी भी मामले में हम दोषी नहीं है। ईमानदारी के साथ काम करने और कॉलेज में नियम विरूद्ध हुए बीएड नामांकन को सत्यापित नहीं करने की हमें सजा मिली है। हम विवि के इस निर्णय के खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय के शरण में जाऐंगे।
डॉ आर बी झा, प्रभारी प्राचार्य, आरएम कॉलेज सहरसा   

1 टिप्पणी:

  1. हर पहलु पर सही सही जाँच होनी ही चाहिए
    ना कि एकतरफा फैसला दे कर किसी को दंडित
    किया जाना चाहिए

    जवाब देंहटाएं

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