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सोमवार, 13 अप्रैल 2020

मानदेय भुगतान नहीं होने के कारण अतिथि शिक्षक की बदहाल



बी एन एम यू,मधेपुरा में पिछले नवम्बर महीना से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को अब पाँच महीना बीत चुके हैं लेकिन उन्हें अपने मानदेय का एक फूटी कौड़ी भी अभी तक नसीब नहीं हुआ है जिसके कारण वे आर्थिक कंगाली की हालत में पहुंच गये हैं।
एक तरफ मानदेय की बेअदायगी तो दूसरी तरफ कोरोना जैसी भयानक महामारी के लाॅकडाॅउन के बीच फँसकर अतिथि शिक्षक


 त्रिशंकु जैसे लटके हुए हैं और विश्वविद्यालय तथा बिहार सरकार की तरफ राहत पाने के लिये आशाभरी निगाहों से देख रहे हैं।जो अतिथि शिक्षक अपने पैतृक गृह से दूर कार्यस्थलों में इस लाॅकडाउन में फँसे हुए हैं उनकी दशा तो और भी दयनीय हो गई है।किराये के मकान मालिक और दुकानदारों का तगादा के सामने उनकी मजबूरी ने उन्हें सब कुछ सहने के लिये गूंगा और बहरा बना दिया है।उन्हें न तो सरकारी राशन की राहत और न ही सरकारी आर्थिक सहयता की राशि मिल सकती है क्योंकि उनपर



विश्वविद्यालयअतिथि शिक्षक का सम्मानजनक बिल्ला चिपका हुआ है।वे अपनी इस स्थिति की दर्दनाक वेदना अपने मन में सहने को मजबूर है।एक मानसिक विषाद से और अपना पारिवारिक खर्च जुटाने के लिये जूझ रहे है।
हद तो इस बात की है कि विश्वविद्यालय द्वारा मानदेय भुगतान का विपत्र मांगने पर महाविद्यालय द्वारा तत्तपरता से नहीं भेजा जाता है।एक तरफ अतिथि शिक्षक अपने परिवार की आवश्यक



आवश्यकताओं की पूर्ति की जुगत में रहते हैं तो दूसरी तरफ उनकी सेवामुक्ति का समाचार भी विश्वविद्यालय से छनकर यदा कदा  आता रहता है।इस लाॅकडाउन की अवस्था में भी अतिथि शिक्षकों को कटनी-छँटनी का भय बना हुआ है जबकि माननीय प्रधानमंत्री जी ने किसी को इस भयानक विषम त्रासदी की अवधि में सेवामुक्त नहीं करने की अपील की है।लाॅकडाउन की अवधि में ही विश्वविद्यालय ने अपने आदेश पत्रांक PVC.O--2/8/20 दिनांक 25/3/2020 के द्वारा पाँच अतिथि शिक्षकों को सेवामुक्त कर दिया ।  इससे पूर्व भी ऊर्दू विषय के पाँच अतिथि शिक्षकों को आनन-फानन में सेवामुक्त कर दिया गया जबकि सही अर्थों में पद उपलब्ध हैं जिसकी जाँच करने की माँग अतिथि शिक्षकों ने की थी जो आज भी अधर में लटका हुआ है।यहाँ विश्वविद्यालय की कार्यशैली भी संदेह से परे नहीं रह जाती है।



आश्चर्य की बात तो यह है कि बी एन एम यू प्रशासन शिक्षा विभाग,बिहार सरकार,पटना के आदेश पत्रांक 15/एम I -- 75/12  उ0शिक्षा --1730, दिनांक 24/08/2012 का हवाला देते हुए विधिवत मापदंडों पर विधिसम्मत तरीके से नियुक्त सैकड़ों अतिथि शिक्षकों को हटाने की कवायद चला रही है, वहीं शिक्षा  विभाग, बिहार सरकार  अपने ही आदेश पत्रांक  15 एम I -- 75/12 --2267 , दिनांक 6/11/2020 की  अनदेखी स्वयं कर रही है और विश्वविद्यालय प्रशासन को भी मजबूर करती नजर आ रही है।ऐसी स्थिति में स्वभाविक रूप से यह आशंका पैदा होती है कि कहीं बेवजह मकड़जाल में फँसे निर्दोष अतिथि शिक्षकों का आर्थिक दोहन न हो।
अतिथि शिक्षक अपने योगदान के समय से पूर्ण समर्पण के साथ शिक्षा की बेहतरी के लिये कार्य कर रहे हैं और लाॅकडाउन की स्थिति में उचित सुविधा सम्पन्न और सुविधा उपलब्ध नहीं होते हुए भी यथासम्भव ई-माध्यमों से विद्यार्थियों को शिक्षा देने हेतु कार्यरत हैं।



अतएव इन कठिन परिस्थितियों में अतिथि शिक्षकों को माननीय कुलपति महोदय,माननीय मुख्यमंत्री महोदय और महामहिम माननीय कुलाधिपति महोदय के समक्ष अपनी विनम्र प्रार्थना करने के अतिरिक्त कोई दूसरा उपाय नजर नहीं आता है।हम अतिथि शिक्षकों को शीध्र मानदेय का भुगतान और  न्याय दिलाया जाय।
               
        डा सतीश कुमार दास,डॉ दीपक कुमार,डॉ अरुण कुमार,डॉ रविशंकर कुमार,डॉ अनुरूध् कुमार ,डॉ श्वेता शरण, डॉ ब्रजेश कुमार, साधना कुमारी, डॉ प्रशांत कुमार मनोज, डॉ प्रभाकर    

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