सारंग तनय@मधेपुरा(बिहार)।मधेपुरा/बिहार: दुनिया के वे देश जो हेल्थ सर्विस के पैमाने पर अग्रणी, आर्थिक रूप से भी अति संपन्न और वैज्ञानिक विकास के अगुआ माने जाते हैं, कोरोना वायरस के सामने पस्त हो गए। ऐसे में भारत में यह संकट ओर कैसा हो सकता है या कितनी भयावह हो सकती है, यह कहना बड़ी मुश्किल है। मानव विकास सूचकांक के रैंकिंग में आज भी 129 वें स्थान है हमारा भारत। देश के 138 करोड़ लोगों के भाग्य को मात्र इस विश्वास पर कि सरकार कुछ करेगी, नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन हमारा अशिक्षित, गरीब और अतार्किक समाज का एक हिस्सा जरूरी सावधानियों का अनुपालन करने की जगह उसे नकारने में लगा है।
दुनिया में अपनी हेल्थ सर्विसेज के लिए विख्यात अमेरिका, ब्रिटेन, इटली,और स्पेन भी आज इस संकट से जूझने में अपने को कमतर पा रहे हैं।
अमेरिका में अगर आज 40% हॉस्पिटल केवल कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए चिन्हित किये जायँ तो भी इस बीमारी के मरीजों के लिए बेड कम पड़ जाएंगे।
भारत में तो न तो उतने डॉक्टर हैं ,न नर्सें, और न ही हॉस्पिटल या बेड। ऊपर से हमारी आबादी अमेरिका से चार गुना ज्यादा है, और क्षेत्रफल लगभग एक तिहाई।
लिहाजा,सिर्फ एक ही उपाय है, समाज का अग्रणी तबका निकले और ओर सभी को समझाए कि यह गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं है , जिसे सरकार पर छोड़कर चुनाव के दौराण खाली उसकी आलोचना की जाय।
कोरोना वायरस से जंग तभी सफल होगी,जब एक-एक व्यक्ति सही सोच के साथ वैज्ञानिक सोच से चले एवं सरकार के आदेश को मानें...!!




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