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रविवार, 1 दिसंबर 2019

BNMU : परिषद् के अधिवेशन में बारह विद्वानों का होगा व्याख्यान शिक्षा, समाज एवं संस्कृति पर होगा मंथन

●शोध शार एवं शोध-आलेख भेजने की अंतिम तिथि 5 दिसंबर

मधेपुरा : भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में पहली बार दर्शन परिषद्, बिहार का राष्ट्रीय अधिवेशन 12-14 दिसंबर तक
आयोजित होने जा रहा है। विश्वविद्यालय में इसकी तैयारी चल रही है और इसको लेकर जनमानस में भी काफी उत्साह है। आयोजन सचिव सह जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि अधिवेशन के अवसर पर एक स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा। इसके लिए राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान सहित कई गणमान्य राजनेताओं एवं शिक्षाविदों का शुभकामना संदेश प्राप्त हो चुका है। लगातार देश के  विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों का शोध-सार एवं शोध-आलेख प्राप्त हो रहे हैं। शोध सार एवं शोध आलेख 5 दिसंबर तक sudhan.ph@gmali.com पर भेजा जा सकता है।
सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए चुनिंदा आलेखों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। साथ ही उसे परिषद् की शोध-पत्रिका 'दार्शनिक अनुगूँज' में निःशुल्क  प्रकाशित किया जाएगा। 

  ◆मुख्य विषय-शिक्षा, समाज एवं संस्कृति:

कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय ने बताया कि यह अधिवेशन भारत सरकार के अंतर्गत संचालन भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा संपोषित है। इसका मुख्य विषय शिक्षा, समाज एवं संस्कृति रखा गया है। शिक्षा, समाज एवं संस्कृति में गहरा संबंध है। इन तीनों के विभिन्न आयामों पर विचार करना ही इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है।
हम जानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक रूप से मानव का संबंध स्थापित होता है। इस संबंध को मजबूत एवं सुदृढ़ बनाने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है। प्रत्येक समाज शिक्षा के माध्यम से ही अपने सदस्यों में अपनी संस्कृति का संचरण करता है।

◆मिलेंगे कई पुरस्कार:
प्रति कुलपति डाॅ. फारूक़ अली ने बताया कि
अधिवेशन में पांच विभागों (समाज दर्शन, धर्म दर्शन, नीति दर्शन, तत्वमीमांसा एवं ज्ञानमीमांसा) के अंतर्गत शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएँगे। इन विभागों में 35 वर्ष से कम आयु के लोगों द्वारा पढे जाने वाले श्रेष्ठ पाँच आलेखों (प्रत्येक विभाग में एक) पर जे. एन. ओझा स्मृति युवा पुरस्कार (प्रत्येक पुरस्कार  एक हजार रूपये का) प्रदान किया जाएगा। इसी तरह 35 वर्ष से कम उम्र के पाँच अन्य लोगों को एक-एक हजार का डाॅ. विजय श्री स्मृति युवा पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा सभी विभागों में प्रस्तुत एक सर्वश्रेष्ठ आलेख पर दो हजार रुपये का प्रोफेसर सोहनराज लक्ष्मीदेवी तातेड़, जोधपुर (राजस्थान) पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

◆बारह विद्वानों का होगा व्याख्यान:
दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने बताया कि अधिवेशन में देश के बारह विद्वानों का व्याख्यान होगा।    इनमें डाॅ. रमेशचन्द्र सिन्हा एवं डाॅ. एच. एस. प्रसाद (नई दिल्ली), डाॅ. जटाशंकर (इलाहाबाद), डाॅ. सभाजीत मिश्र (गोरखपुर), डाॅ. सोहनराज तातेड़ (जोधपुर), डाॅ. सरस्वती मिश्रा (राँची), डाॅ. महेश सिंह (आरा), डाॅ. आई. एन. सिन्हा, डाॅ. एन. पी. तिवारी एवं डाॅ. पूनम सिंह  (पटना), डाॅ. प्रभु नारायण मंडल एवं डाॅ. शंभु प्रसाद सिंह (भागलपुर) के नाम शामिल  हैं। व्याख्यान कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध गाँधीवादी विचारक डाॅ. रामजी सिंह (भागलपुर) करेंगे।

◆बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर होगी विशेष संगोष्ठी:
अधिवेशन के अवसर पर दो विशेष संगोष्ठियाँ भी आयोजित की गई हैं। पहली संगोष्ठी का विषय 'बिहार की दार्शनिक एवं सांस्कृतिक विरासत' है। इसके जरिए पूरे बिहार और विशेषकर कोसी की विरासत को सामने लाया जाएगा।

मधेपुरा जिले की स्थापना मई 1981 में हुई। यह उत्तर में अररिया एवं सुपौल, दक्षिण में खगड़िया एवं भागलपुर, पूरब में पूर्णियाँ और पश्चिम में सहरसा जिला से घिरा है। यह शहर ऐतिहासिक, धार्मिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक दृष्टि से काफी समृद्ध है।

चंडी स्थान, सिंहेश्वर स्थान, महर्षि मेंही अवतरण भूमि, कारू खिरहर स्थान, बाबा बिसु राउत धाम आदि यहाँ के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। यह मंडन-भारती, लक्ष्मीनाथ गोसाईं आदि दार्शनिकों की भूमि है। सम्मेलन के दौरान इन सबों के योगदानों की चर्चा होगी।

इस संगोष्ठी में डाॅ. अरूण मिश्र (नई दिल्ली), डाॅ. अविनाश कुमार श्रीवास्तव (नालंदा), डाॅ. अमरनाथ झा (दरभंगा), डाॅ. सुधा जैन (वाराणसी), डाॅ. अरूणाभ सौरभ (भोपाल), डाॅ. अमिता जायसवाल एवं डाॅ. प्रणय प्रियंवद (पटना), डाॅ. शिवशंकर सिंह पारिजात, डाॅ. रमण सिन्हा एवं डाॅ. रविशंकर कुमार चौधरी (भागलपुर) के नाम शामिल हैं। इनके अलावा बीएनएमयू की ओर से वरिष्ठ  साहित्यकार डाॅ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी, सिंडीकेट सदस्य डाॅ. रामनरेश सिंह, आरजेएम काॅलेज, सहरसा की प्रधानाचार्या डाॅ. रेणु सिंह, उप कुलसचिव अकादमिक डाॅ. एम. आई. रहमान, वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. सिद्धेश्वर काश्यप एवं युवा प्राध्यापक डाॅ. कमल मोहन चुन्नु भी इसमें अपना आलेख प्रस्तुत करेंगे।

◆'गाँधी 150 : विमर्श एवं विकल्प' विषयक विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी:-
दूसरी संगोष्ठी 'गाँधी 150 : विमर्श एवं विकल्प' पर केन्द्रित है। हम जानते हैं कि गाँधी ने दुनिया को सत्य एवं अहिंसा का रास्ता दिखाया है। इसी रास्ते पर चलकर देश-दुनिया का कल्याण हो सकता है। हमें गाँधी के सपनों की दुनिया बनानी है। 

गाँधी के जीवन-दर्शन का विस्तृत फलक है। इसके हरएक आयामों को लेकर देश-दुनिया में प्रयोग चल रहे हैं। स्वच्छता अभियान, मेक इन इंडिया, स्किल डेवलपमेंट, अर्न ह्वाइल लर्न आदि कार्यक्रम गाँधी से ही प्रेरित हैं।

गाँधी को 150 वर्ष हो गए। लोगों को लग सकता है कि गाँधी की बात अब पुरानी हो गयी है। लेकिन सच्चाई यह है कि गाँधी आज भी प्रासंगिक हैं। गाँधी के विचारों की चमक बढ़ती जा रही है। दुनिया के युवा गाँधी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

आज गाँधी को अपनाना हमारी मज़बूरी हो गई है। गाँधी-दर्शन में ही आतंकवाद, पर्यावरण संकट, बेरोजगारी, विषमता, अनैतिकता आदि समस्याओं का समाधान है। गाँधी के बताए रास्ते पर चलकर ही दुनिया का कल्याण हो सकता है। इसके मद्देनजर अधिवेशन में गाँधी को केंद्र में रखकर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इसमें देश के कई प्रमुख विद्वान भाग लेंगे। इनमें डाॅ. आलोक टंडन  (हरदोई), किशन कालजयी (नई दिल्ली), डाॅ. विजयकांत दुबे (वाराणसी), स्वयं प्रकाश (पटना), डाॅ. प्रभाष कुमार  (नालंदा), डाॅ. सरोज कुमार वर्मा (मुजफ्फरपुर), डाॅ. राजीव कुमार (दरभंगा), डाॅ. शैलेन्द्र कुमार (बोधगया), डाॅ. गिरीश चंद्र पाण्डेय (मुंगेर), डाॅ. ईश्वरचंद (खगड़िया), डाॅ. परमानंद सिंह, डाॅ. राजेश रंजन तिवारी, डाॅ. विजय कुमार, डाॅ. उमेश प्रसाद नीरज, डाॅ. अमित रंजन सिंह एवं डाॅ. शंभु पासवान (भागलपुर) के नाम शामिल हैं। इनके अलावा बीएनएमयू की ओर से खेल सचिव डाॅ. अबुल फजल भी इसमें अपना आलेख प्रस्तुत करेंगे।

◆कोर कमिटी का गठन:
कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने बताया कि तत्काल अधिवेशन की तैयारी हेतु कोर कमिटी का गठन किया गया है। कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय इसके प्रधान संरक्षक एवं प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली संरक्षक होंगे। विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष सह मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. ज्ञानंजय द्विवेदी, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के प्रधानाचार्य डाॅ. के. पी. यादव एवं पार्वती साइंस काॅलेज, मधेपुरा के प्रधानाचार्य  डॉ. राजीव सिन्हा को  स्वागताध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।  दर्शनशास्त्र विभाग, टी. पी. काॅलेज, मधेपुरा के अध्यक्ष डॉ. शिवशंकर कुमार, मधेपुरा काॅलेज, मधेपुरा के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार, यूभीके काॅलेज, कड़ामा के प्रधानाचार्य डॉ. माधवेन्द्र झा एवं एएलवाई काॅलेज, त्रिवेणीगंज के प्रधानाचार्य डॉ. जयदेव प्रसाद यादव को    संयोजक बनाया गया है। विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सह विश्वविद्यालय जनसंपर्क पदाधिकारी एवं दर्शन परिषद्, बिहार के संयुक्त मंत्री सह मीडिया प्रभारी डॉ. सुधांशु शेखर को आयोजन सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

◆दिसंबर में ही दिया गया था प्रस्ताव:

मालूम हो कि दिसंबर, 2018 को पटना में आयोजित 41 वें वार्षिक अधिवेशन की आमसभा में बीएनएमयू, मधेपुरा में सम्मेलन के आयोजन प्रस्ताव दिया गया था। इसके लिए बीएनएमयू, मधेपुरा के अलावा पूर्णियाँ काॅलेज, पूर्णियाँ, एम. एल. ए. काॅलेज, कसाब एवं एल. एस. काॅलेज, मुजफ्फरपुर ने भी अपनी दावेदारी पेश की थीं। आमसभा ने सभी प्रस्तावों के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया और अंततः बीएनएमयू के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थीं। यह विश्वविद्यालय के लिए गौरब की बात है। यहाँ पहली बार यह अधिवेशन आयोजित होने जा रहा है।।।

   सारंग तनय,
उपसंपादक, मधेपुरा(बिहार) ।

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