संपादक : बिहार के सुप्रसिद्ध सिंहेश्वर मंदिर के सफल संचालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में मंदिर न्यास समिति के नई कमेटी का गठन किया गया है। कमिटी अगले आदेश तक के लिए तत्काल अस्थायी
बनाई गई है। इस संबंध में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने कमेटी गठन की अधिसूचना जारी की है। पर्षद अध्यक्ष एके जैन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार डीएम मधेपुरा की अध्यक्ष, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मधेपुरा को उपाध्यक्ष, सदर एसडीओ को सचिव, सीए मनीष सर्राफ को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वही सदस्य में पंडा समाज से संजीव ठाकुर,विजेंद्र ठाकुर को लिया गया है। 03/37 वाद दायर करने वाले के परिजन की तरफ से स्वर्गीय कार्तिक प्रसाद सिंह के पौत्र विजय कुमार सिंह एवं स्मिता सिंह को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावे पटोरी के पूर्व मुखिया मदन मोहन सिंह, सियाराम यादव एवं एससी एसटी से बबलू ऋषिदेव को नई कमेटी में शामिल किया गया है। बता दे कि धार्मिक न्यास पर्षद ने जनवरी से ही कमेटी गठन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी थी। यद्यपि पर्षद के द्वारा कई बार पत्राचार किये जाने के बाद नवम्बर में डीएम ने 11 लोगों की सूची पर्षद को भेजी थी। जिसमे से पर्षद ने तीन नामों को हटाकर नए नामों को जोड़ा। डीएम द्वारा पर्षद को भेजी गई सूची में से पंडा समाज के कन्हैया ठाकुर एवं सरोज सिंह को इनके विरुद्ध लगाए गए आरोप की चल रही जांच के चलते कमेटी में शामिल नही किया गया।
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डीएम की सूची में शामिल थे दागी सदस्य: कमेटी गठन हेतु डीएम ने डीडीसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी। इसी चयन समिति ने नामों को तय किया था। लेकिन जब कमेटी गठन हेतु नामों को पर्षद भेजा गया तो कई आपत्ति होने लगी। मामला पर्षद के अध्यक्ष तक जा पहुँचा था। सर्वाधिक विवाद निवर्तमान कमेटी के स्थानीय निवर्तमान सदस्य कन्हैया ठाकुर,संजीव ठाकुर,सरोज सिंह के विरुद्ध था। पंडा समाज के द्वारा चयनित प्रतिनिधि को डीएम के प्रस्तावित कमेटी में नही लिए जाने पर भी पर्षद अध्यक्ष को शिकायत हुई। पंडा समाज ने सदस्य के लिए धर्म नारायण ठाकुर एवं विजेंद्र ठाकुर का चयन किया था। चयन समिति के सभी सदस्यों को जानकारी दिए जाने के वावजूद कमेटी गठन हेतु इन दोनों के नामों को प्रस्तावित नही करके पुराने सदस्य संजीव ठाकुर एवं कन्हैया ठाकुर का नाम ही प्रस्तावित कर दिया गया था। पूर्व सदस्य एवं पंडा समाज से चयनित प्रतिनिधि धर्मनारायण ठाकुर ने पर्षद अध्यक्ष से मिलकर इसकी शिकायत की थी। पर्षद अध्यक्ष ने भी पंडा समाज द्वारा चयनित व्यक्ति का नाम नही भेजे जाने को गलत बताया।
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कमिटी गठन में सत्तारूढ दल हावी : कमेटी में सदस्य के रूप में आने के लिए खूब पैरवी चली। डीएम से लेकर पर्षद अध्यक्ष तक हाई लेवल की पैरवी हुई। राजनीतिक प्रेसर की वजह से जिला प्रशासन काफी लेट से कमेटी के लिए नामों को भेज पायी। वही डीएम के पास से नाम जाने के बाद पर्षद अध्यक्ष के पास भी पैरवी होते रही। इन्ही सब वजहों से कमेटी का कार्यकाल पूरा होने के एक माह बाद नई कमेटी गठन की जा सकी। राजनीतिक दबाब भी काफी हावी रही। कोसी के दो-दो सफेदपोश कमिटी गठन में अपना दबदबा कायम रखा। बता दे कि पिछले दिनों हुए उपचुनाव में सत्तादल के सिमरीबख्तियारपुर सीट पर हार का सबसे बड़ा कारण मटेश्वर धाम न्यास समिति गठन ही बना था।
बनाई गई है। इस संबंध में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने कमेटी गठन की अधिसूचना जारी की है। पर्षद अध्यक्ष एके जैन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार डीएम मधेपुरा की अध्यक्ष, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मधेपुरा को उपाध्यक्ष, सदर एसडीओ को सचिव, सीए मनीष सर्राफ को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वही सदस्य में पंडा समाज से संजीव ठाकुर,विजेंद्र ठाकुर को लिया गया है। 03/37 वाद दायर करने वाले के परिजन की तरफ से स्वर्गीय कार्तिक प्रसाद सिंह के पौत्र विजय कुमार सिंह एवं स्मिता सिंह को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावे पटोरी के पूर्व मुखिया मदन मोहन सिंह, सियाराम यादव एवं एससी एसटी से बबलू ऋषिदेव को नई कमेटी में शामिल किया गया है। बता दे कि धार्मिक न्यास पर्षद ने जनवरी से ही कमेटी गठन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी थी। यद्यपि पर्षद के द्वारा कई बार पत्राचार किये जाने के बाद नवम्बर में डीएम ने 11 लोगों की सूची पर्षद को भेजी थी। जिसमे से पर्षद ने तीन नामों को हटाकर नए नामों को जोड़ा। डीएम द्वारा पर्षद को भेजी गई सूची में से पंडा समाज के कन्हैया ठाकुर एवं सरोज सिंह को इनके विरुद्ध लगाए गए आरोप की चल रही जांच के चलते कमेटी में शामिल नही किया गया।
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डीएम की सूची में शामिल थे दागी सदस्य: कमेटी गठन हेतु डीएम ने डीडीसी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय चयन समिति बनाई गई थी। इसी चयन समिति ने नामों को तय किया था। लेकिन जब कमेटी गठन हेतु नामों को पर्षद भेजा गया तो कई आपत्ति होने लगी। मामला पर्षद के अध्यक्ष तक जा पहुँचा था। सर्वाधिक विवाद निवर्तमान कमेटी के स्थानीय निवर्तमान सदस्य कन्हैया ठाकुर,संजीव ठाकुर,सरोज सिंह के विरुद्ध था। पंडा समाज के द्वारा चयनित प्रतिनिधि को डीएम के प्रस्तावित कमेटी में नही लिए जाने पर भी पर्षद अध्यक्ष को शिकायत हुई। पंडा समाज ने सदस्य के लिए धर्म नारायण ठाकुर एवं विजेंद्र ठाकुर का चयन किया था। चयन समिति के सभी सदस्यों को जानकारी दिए जाने के वावजूद कमेटी गठन हेतु इन दोनों के नामों को प्रस्तावित नही करके पुराने सदस्य संजीव ठाकुर एवं कन्हैया ठाकुर का नाम ही प्रस्तावित कर दिया गया था। पूर्व सदस्य एवं पंडा समाज से चयनित प्रतिनिधि धर्मनारायण ठाकुर ने पर्षद अध्यक्ष से मिलकर इसकी शिकायत की थी। पर्षद अध्यक्ष ने भी पंडा समाज द्वारा चयनित व्यक्ति का नाम नही भेजे जाने को गलत बताया।
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कमिटी गठन में सत्तारूढ दल हावी : कमेटी में सदस्य के रूप में आने के लिए खूब पैरवी चली। डीएम से लेकर पर्षद अध्यक्ष तक हाई लेवल की पैरवी हुई। राजनीतिक प्रेसर की वजह से जिला प्रशासन काफी लेट से कमेटी के लिए नामों को भेज पायी। वही डीएम के पास से नाम जाने के बाद पर्षद अध्यक्ष के पास भी पैरवी होते रही। इन्ही सब वजहों से कमेटी का कार्यकाल पूरा होने के एक माह बाद नई कमेटी गठन की जा सकी। राजनीतिक दबाब भी काफी हावी रही। कोसी के दो-दो सफेदपोश कमिटी गठन में अपना दबदबा कायम रखा। बता दे कि पिछले दिनों हुए उपचुनाव में सत्तादल के सिमरीबख्तियारपुर सीट पर हार का सबसे बड़ा कारण मटेश्वर धाम न्यास समिति गठन ही बना था।



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