कला सांस्कृतिक एवं युवा विभाग की ओर से कलाकारों के चयन को लेकर आयोजित प्रतियोगिता जिला मुख्यालय के कला भवन में शनिवार को सम्पन्न हुई। समापन के मौके पर
सृजन दर्पण के विकास कुमार एवं साथी को समूह लोकनृत्य में प्रथम स्थान आने पर जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किए।यह लोकनृत्य पुष्पा कुमारी के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया ।
सृजन दर्पण के मुन्नी कुमारी ने बधैया लोक नृत्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। सृजन दर्पण के कलाकारों ने बताया की समय के शुरू से ही हमारे समाज में बच्चों के जन्म पर बधैया लोकनृत्य होता आया ।इसके मार्फत संस्कार और
अशीम आशीष दी जाती है। जो बच्चों के जीवन में संस्कार सम्भल बनकर काम आता है । आज की फैशनपरस्ती ने सबकुछ बदल दिया है । बाजे पर पॉप संगीत एवं धूम धड़ाके के बीच कोमल तन और मन का परिवेश से हटकर भावहीन उत्सव मनाया जाता है। नई पीढ़ी में भाव की शुष्कता एवं मूल्यहीनता का एक छोटा कारण यही से शुरू होता है क्योंकि भाव अचेतन का अनायास पोषण करता है।
अपनी कल्याणकारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में सृजन दर्पण के ऊर्जावान कलाकार अनवरत लगे रहते हैं । उसी कड़ी में जीवन के प्रथम सोपान पर होने वाले इस संस्कार गीत को बचाने और चलन में लाने का एक शसक्त प्रयास किया है। इस लोकनृत्य में सृजन दर्पण के सचिव बिकास कुमार, सत्यम कुमार, निखिल कुमार, सौरभ कुमार, सुमन कुमार, राखी कुमारी, रूपा कुमारी, अंजली कुमारी, सोनाली भारती, सुरेश कुमार, नरेश चौपाल । पूरी टीम की बेहतरीन प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।
सृजन दर्पण के विकास कुमार एवं साथी को समूह लोकनृत्य में प्रथम स्थान आने पर जिला पदाधिकारी नवदीप शुक्ला ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किए।यह लोकनृत्य पुष्पा कुमारी के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया ।
सृजन दर्पण के मुन्नी कुमारी ने बधैया लोक नृत्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। सृजन दर्पण के कलाकारों ने बताया की समय के शुरू से ही हमारे समाज में बच्चों के जन्म पर बधैया लोकनृत्य होता आया ।इसके मार्फत संस्कार और
अशीम आशीष दी जाती है। जो बच्चों के जीवन में संस्कार सम्भल बनकर काम आता है । आज की फैशनपरस्ती ने सबकुछ बदल दिया है । बाजे पर पॉप संगीत एवं धूम धड़ाके के बीच कोमल तन और मन का परिवेश से हटकर भावहीन उत्सव मनाया जाता है। नई पीढ़ी में भाव की शुष्कता एवं मूल्यहीनता का एक छोटा कारण यही से शुरू होता है क्योंकि भाव अचेतन का अनायास पोषण करता है।
अपनी कल्याणकारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में सृजन दर्पण के ऊर्जावान कलाकार अनवरत लगे रहते हैं । उसी कड़ी में जीवन के प्रथम सोपान पर होने वाले इस संस्कार गीत को बचाने और चलन में लाने का एक शसक्त प्रयास किया है। इस लोकनृत्य में सृजन दर्पण के सचिव बिकास कुमार, सत्यम कुमार, निखिल कुमार, सौरभ कुमार, सुमन कुमार, राखी कुमारी, रूपा कुमारी, अंजली कुमारी, सोनाली भारती, सुरेश कुमार, नरेश चौपाल । पूरी टीम की बेहतरीन प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।




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