ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग के द्वारा नाट्यशास्त्र के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों ने मंगलवार को विश्वविद्यालय स्थित चौरंगी पर प्लास्टिक से हो रहे नुकसान से अवगत करवाते हुए नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की
उन्होंने अपने नाटक के माध्यम से लोगों को बताया कि हमारे देश में लोग हर उपयोगी सामान लाने के लिए प्लास्टिक का हीं इस्तेमाल करते हैं. जो कि बहुत हीं हानिकारक है. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक हजारों वर्षों में भी ज्यों का त्यों रहता है. जिस जगह प्लास्टिक को मिट्टी में गाड़ा जाता है उस जगह अगर घर बनाया जाए तो कुछ वर्षों के बाद घर की दीवारें खुद ब खुद टेढ़ी होने लगती है. अगर प्लास्टिक में आग लगाई जाए तो उसका धुआँ लोगों को बीमार करने के लिए काफी है. उन्होंने नाटक के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने की शपथ दिलवाई. नाटक में सुमन वृक्ष, सुशांत कुमार, राजकुमार, राजेश कुमार, अमित आनंद, विवेक कुमार, सुमित कुमार ठाकुर , सुष्मिता कुमारी, दीपक कुमार पप्पू, श्याम किशोर कामत, सुनीत साना, अभय प्रताप, हीरालाल राय ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से लोगों का दिल जीत लिया. मौके पर विभागाध्यक्ष लावण्य कीर्ति सिंह काव्या, डॉ. वेद प्रकाश सिंह, डॉ. सुनील कुमार ठाकुर, प्रो. हेमेंद्र कुमार लाल, प्रो. महिंद्र नारायण चौधरी, प्रो. सुधीर कुमार, प्रो. विजय कुमार साह, प्रो. श्याम भास्कर मौजूद थे.

उन्होंने अपने नाटक के माध्यम से लोगों को बताया कि हमारे देश में लोग हर उपयोगी सामान लाने के लिए प्लास्टिक का हीं इस्तेमाल करते हैं. जो कि बहुत हीं हानिकारक है. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक हजारों वर्षों में भी ज्यों का त्यों रहता है. जिस जगह प्लास्टिक को मिट्टी में गाड़ा जाता है उस जगह अगर घर बनाया जाए तो कुछ वर्षों के बाद घर की दीवारें खुद ब खुद टेढ़ी होने लगती है. अगर प्लास्टिक में आग लगाई जाए तो उसका धुआँ लोगों को बीमार करने के लिए काफी है. उन्होंने नाटक के माध्यम से लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने की शपथ दिलवाई. नाटक में सुमन वृक्ष, सुशांत कुमार, राजकुमार, राजेश कुमार, अमित आनंद, विवेक कुमार, सुमित कुमार ठाकुर , सुष्मिता कुमारी, दीपक कुमार पप्पू, श्याम किशोर कामत, सुनीत साना, अभय प्रताप, हीरालाल राय ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से लोगों का दिल जीत लिया. मौके पर विभागाध्यक्ष लावण्य कीर्ति सिंह काव्या, डॉ. वेद प्रकाश सिंह, डॉ. सुनील कुमार ठाकुर, प्रो. हेमेंद्र कुमार लाल, प्रो. महिंद्र नारायण चौधरी, प्रो. सुधीर कुमार, प्रो. विजय कुमार साह, प्रो. श्याम भास्कर मौजूद थे.


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