पटना. वीर कुंवर सिंह की लोकगाथा गाते-गाते तीस्ता जिंदगी की जंग हार गई। बिहार में भोजपुरी लोकगाथा और लोकनाट्य का सबसे चमकदार उभरता सितारा अनूभूति उर्फ तीस्ता का मंगलवार शाम पटना एम्स में 16 साल की उम्र में निधन हो गया।
लोकगायिका के रूप में पहचान बना चुकी तीस्ता को साधारण बुखार हुआ था। परिवारवालों ने पटना एम्स में भर्ती कराया था। लेकिन सुधार की जगह तीस्ता की हालत खराब ही होती गयी। डॉक्टरों ने बताया कि तीस्ता को एक्यूट सेप्टेसेमिया हो गया था। इसमें पूरे शरीर में खून संक्रमित हो गया। तीस्ता को गले से कुछ भी निगला नहीं जा रहा था। आखिर में उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। अंतत : मंगलवार रात तीस्ता जिंदगी की जंग हार गई। तीस्ता के पिता उदय नारायण सिंह अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात एक किये हुए थे। वहीं तीस्ता की गायिकी के दीवाने सोशल मीडिया पर उसके स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे। भोजपुरी फिल्म जगत से लेकर आम आदमी भी उसकी मदद के लिए आगे आए थे। मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा ने भी तीस्ता के स्वस्थ होने की कामना की थी।
जनसरोकार के विषयों को उठाने वाले निराला बिदेशिया फेसबुक पर लिखते हैं ठीक चार दिन पहले तिस्ता के साथ आखिरी संवाद हुआ था। पटना एम्स में। उससे मिलके निकलते वक्त लगा था कि वह ठीक हो जाएगी। परसो शाम को जब डॉक्टर से बात हुई यशवंत भइया की तो डॉक्टर ने कह दिया था कि अब केस हाथ से बाहर है। आज सुबह तीस्ता के भाई से बात हुई तो उसने कहा सुधार है। लेकिन यशवंत भइया ने कहा कि डॉक्टर कह रहे हैं कि किडनी-लीवर के बाद शरीर के सारे ऑर्गेन भी डेड हो चुके हैं। बस वेंटिलेशन के कारण कहने भर को जिंदा है। यशवंत भइया के जरिये दोपहर आते-आते मालूम चल चुका था कि अब चमत्कार वमत्कार सब भ्रम वहम है। यशवंत भइया ने दोपहर में ही कहा था कि अब आगे की तैयारी हो। लेकिन तिस्ता की मौत के इतने देर बाद भी बहुत अविश्वास के साथ ही लिख पा रहा हूं कि वह नही है। अंतहीन पीड़ा के बीच चमकती आंखों और मुस्कुराते चेहरे के साथ उससे हुई आखिरी संवाद को कभी नही भूल पाऊंगा।
लोकगायिका के रूप में पहचान बना चुकी तीस्ता को साधारण बुखार हुआ था। परिवारवालों ने पटना एम्स में भर्ती कराया था। लेकिन सुधार की जगह तीस्ता की हालत खराब ही होती गयी। डॉक्टरों ने बताया कि तीस्ता को एक्यूट सेप्टेसेमिया हो गया था। इसमें पूरे शरीर में खून संक्रमित हो गया। तीस्ता को गले से कुछ भी निगला नहीं जा रहा था। आखिर में उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। अंतत : मंगलवार रात तीस्ता जिंदगी की जंग हार गई। तीस्ता के पिता उदय नारायण सिंह अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात एक किये हुए थे। वहीं तीस्ता की गायिकी के दीवाने सोशल मीडिया पर उसके स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे। भोजपुरी फिल्म जगत से लेकर आम आदमी भी उसकी मदद के लिए आगे आए थे। मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा ने भी तीस्ता के स्वस्थ होने की कामना की थी।
बहुत अविश्वास के साथ लिख पा रहा हूं कि वह नहीं है
जनसरोकार के विषयों को उठाने वाले निराला बिदेशिया फेसबुक पर लिखते हैं ठीक चार दिन पहले तिस्ता के साथ आखिरी संवाद हुआ था। पटना एम्स में। उससे मिलके निकलते वक्त लगा था कि वह ठीक हो जाएगी। परसो शाम को जब डॉक्टर से बात हुई यशवंत भइया की तो डॉक्टर ने कह दिया था कि अब केस हाथ से बाहर है। आज सुबह तीस्ता के भाई से बात हुई तो उसने कहा सुधार है। लेकिन यशवंत भइया ने कहा कि डॉक्टर कह रहे हैं कि किडनी-लीवर के बाद शरीर के सारे ऑर्गेन भी डेड हो चुके हैं। बस वेंटिलेशन के कारण कहने भर को जिंदा है। यशवंत भइया के जरिये दोपहर आते-आते मालूम चल चुका था कि अब चमत्कार वमत्कार सब भ्रम वहम है। यशवंत भइया ने दोपहर में ही कहा था कि अब आगे की तैयारी हो। लेकिन तिस्ता की मौत के इतने देर बाद भी बहुत अविश्वास के साथ ही लिख पा रहा हूं कि वह नही है। अंतहीन पीड़ा के बीच चमकती आंखों और मुस्कुराते चेहरे के साथ उससे हुई आखिरी संवाद को कभी नही भूल पाऊंगा।
तुम्हारा असमय जाना हमेशा अखरेगा
हिन्दुस्तान अखबार के वरीय संवाददाता चंदन द्विवेदी फेसबुक पर लिखते हैं तीस्ता तुम्हारा असमय जाना हमेशा अखरेगा। तुम्हें याद करेंगे तीस्ता तुम्हारी लगन के लिए। लोककला को जीवित रखने के तुम्हारे प्रयासों के लिये। खुद को कोसेंगे भी कि काश सारा काम छोड़कर आज तुम्हारे पास एम्स चले गए होते। भगवान तीस्ता जैसी बेटी सबको दे जो 17 साल की अल्पायु में भी यह बता के गई कि लोक के लिए लड़ा कैसे जाता है।
तीस्ता ने बस अपना ठिकाना बदला है
राकेश तिवारी लिखते हैं तीस्ता एक चंचल नदी है। तीस्ता ने बस अपना ठिकाना बदला है, वो सुरीली चंचल सुर सरिता बनकर हमेशा भोजपुरी के बहाव को ज़िंदा रखेगी। उसके योगदान को सब मिलकर आगे बढ़ाएं। आएं सब मिलकर उसके सुरीले, रसदार गीत गायें, यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सत्य मोहन श्रीवास्तव लिखते हैं करेजा फाटि रहल बा। तीस्ता खाती भगवान केहुं के ना सुनलें, निष्ठुरता कायम राखत बुचिया के अपना संगे ले गइलें।
सत्य मोहन श्रीवास्तव लिखते हैं करेजा फाटि रहल बा। तीस्ता खाती भगवान केहुं के ना सुनलें, निष्ठुरता कायम राखत बुचिया के अपना संगे ले गइलें।




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें