संपादक- आर. कुमार
बीएनएमयू में सभी काम नियम-परिनियम के अनुरूप हो रहा है। सभी निर्णय लोकतांत्रिक रूप से लिए गए हैं और सब जगह पारदर्शिता है। यह बातें कुलपति डॉ अवध किशोर राय ने शनिवार को प्रेस वार्ता आयोजित कर कही। उन्होंने कुलसचिव डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव के इस्तीफे की खबर पर खुल कर अपनी बात रखी। इस दौरान विवि की कार्यप्रणाली पर कुलसचिव द्वारा उठाए गए सवालों का कुलपति ने एक-एक कर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आज अनाधिकृत रूप से कुलसचिव के इस्तीफे की खबर आई है। लेकिन विवि को इसकी कोई सूचना नहीं है। कुलपति ने कहा कि विवि प्रशासन को बिना विश्वास में लिए राजभवन में अपनी बात रखना उचित नहीं है। कुलसचिव को अपनी बात पहले कुलपति से कहनी चाहिए। प्रेस वार्ता के प्रतिकुलपति प्रो डॉ फारूक अली, वित्तीय सलाहकार सुरेश चंद्र दास, प्रभारी कुलसचिव डॉ शैलेंद्र कुमार सहित, परीक्षा नियंत्रक डॉ नवीन कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
कुलपति ने कहा कि परीक्षा की सभी फाइलों पर कुलसचिव की सहमति जरूरी नहीं है। परीक्षा कार्य के लिए परीक्षा नियंत्रक जिम्मेदार होते हैं। जहां तक वित्त का सवाल है, इस मामले में वित्त परामर्शी सबसे बड़े अधिकारी होते हैं। विवि में वित्त परामर्शी की सलाह के बगैर कोई भी वित्तीय कार्य नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि विवि की कार्यशैली में लगातार सकारात्मक बदलाव हो रहा है। इसके कारण कुछ लोगों को परेशानी हो रही है। विवि में सुधारात्मक तरीके से अब तक काम किया गया है। लेकिन यदि कोई अवरोध करेंगे, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
कुलसचिव के इस्तीफे से आहत कुलपति ने कहा कि डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है। कुलपति ने कहा कि विवि को पटरी पर लाने के लिए 3 दिनों के अंदर संचिका का निष्पादन करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन डॉ नरेंद्र ने कुलसचिव के रूप में अधिकांश संचिकाओं में पृच्छा कर उसे लटका कर रखा। ऐसे में विश्वविद्यालय का काम बाधित होता रहा है। इस प्रकार के मिथ्या आरोपों से भावनाओं को ठेस लगती है।
विवि की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध कुलसचिव डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव ने अपना इस्तीफा राजभवन को सौंप दिया है। हालांकि, अभी तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। कुलाधिपति के प्रधान सचिव के नाम अपने इस्तीफा में कुलसचिव ने लिखा है कि विवि के मौजूदा हालात में वह अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में असहज महसूस कर रहे हैं। इधर, कुलसचिव के इस्तीफे की पेशकश के बाद विवि में हलचल तेज है।
बीएनएमयू में सभी काम नियम-परिनियम के अनुरूप हो रहा है। सभी निर्णय लोकतांत्रिक रूप से लिए गए हैं और सब जगह पारदर्शिता है। यह बातें कुलपति डॉ अवध किशोर राय ने शनिवार को प्रेस वार्ता आयोजित कर कही। उन्होंने कुलसचिव डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव के इस्तीफे की खबर पर खुल कर अपनी बात रखी। इस दौरान विवि की कार्यप्रणाली पर कुलसचिव द्वारा उठाए गए सवालों का कुलपति ने एक-एक कर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आज अनाधिकृत रूप से कुलसचिव के इस्तीफे की खबर आई है। लेकिन विवि को इसकी कोई सूचना नहीं है। कुलपति ने कहा कि विवि प्रशासन को बिना विश्वास में लिए राजभवन में अपनी बात रखना उचित नहीं है। कुलसचिव को अपनी बात पहले कुलपति से कहनी चाहिए। प्रेस वार्ता के प्रतिकुलपति प्रो डॉ फारूक अली, वित्तीय सलाहकार सुरेश चंद्र दास, प्रभारी कुलसचिव डॉ शैलेंद्र कुमार सहित, परीक्षा नियंत्रक डॉ नवीन कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
कुलपति ने कहा कि परीक्षा की सभी फाइलों पर कुलसचिव की सहमति जरूरी नहीं है। परीक्षा कार्य के लिए परीक्षा नियंत्रक जिम्मेदार होते हैं। जहां तक वित्त का सवाल है, इस मामले में वित्त परामर्शी सबसे बड़े अधिकारी होते हैं। विवि में वित्त परामर्शी की सलाह के बगैर कोई भी वित्तीय कार्य नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि विवि की कार्यशैली में लगातार सकारात्मक बदलाव हो रहा है। इसके कारण कुछ लोगों को परेशानी हो रही है। विवि में सुधारात्मक तरीके से अब तक काम किया गया है। लेकिन यदि कोई अवरोध करेंगे, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
कुलसचिव के इस्तीफे से आहत कुलपति ने कहा कि डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है। कुलपति ने कहा कि विवि को पटरी पर लाने के लिए 3 दिनों के अंदर संचिका का निष्पादन करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन डॉ नरेंद्र ने कुलसचिव के रूप में अधिकांश संचिकाओं में पृच्छा कर उसे लटका कर रखा। ऐसे में विश्वविद्यालय का काम बाधित होता रहा है। इस प्रकार के मिथ्या आरोपों से भावनाओं को ठेस लगती है।
विवि की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध कुलसचिव डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव ने अपना इस्तीफा राजभवन को सौंप दिया है। हालांकि, अभी तक इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। कुलाधिपति के प्रधान सचिव के नाम अपने इस्तीफा में कुलसचिव ने लिखा है कि विवि के मौजूदा हालात में वह अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में असहज महसूस कर रहे हैं। इधर, कुलसचिव के इस्तीफे की पेशकश के बाद विवि में हलचल तेज है।



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