इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीयों का बोल-बाला दुनिया के हरेक क्षेत्रों में है। आए दिन हमें कही न कहीं यह पढ़ने को मिल ही जाता है कि किसी भारतीय शख्स को गूगल या फिर किसी मल्टीनेशनल कंपनी ने करोड़ों का पैकेज ऑफर किया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति को भी यह कहना पड़ा कि भारतीय आयेंगे और यहां छा जायेंगे।हमारे देश में इन दिनों युवा प्रतिभायें बेहतर प्रदर्शन कर रही है। कहते हैं न हीरे की असली परख सिर्फ जौहरी ही कर सकता है कुछ ऐसा ही है गूगल कम्पनी के साथ भी। गूगल करोड़ों की भीड़ में भी योग्य प्रतिभा को ढूंढ निकालता है। ऐसी ही प्रतिभा को एक बार फिर खोज निकाला है गूगल ने। बिहार के रहने वाले आदर्श कुमार को गूगल ने एक करोड़ बीस लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया है।
हौसले और मेहनत से मिलता है मुकाम आदर्श कुमार या उन जैसी प्रतिभाओं को देखकर लगता है कि जब हौसला बना लिया जाए ऊँची उड़ान का फिर तो फ़िजूल ही है कद देखना आसमान का। अगर लक्ष्य के प्रति निष्ठावान होकर आगे बढ़ा जाए तो सफलता के आसमां को छूने से कोई नहीं रोक सकता है, लेकिन सफलता की बुलंदियों तक पहुँचने का रास्ता मेहनत की पगडंडी से होकर ही गुजरता है। आदर्श मूल रूप से बिहार के पटना की बुद्धा कॉलोनी के निवासी हैं और उन्होंने IIT रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। लेकिन मेकैनिकल इंजीनियर की डिग्री लेने के बाद भी वह अपना करियर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के तौर पर शुरू कर रहे हैं।प्रोग्रामिंग में शुरू से थी रुची बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाले आदर्श ने बारहवीं के मैथ्स और कैमिस्ट्री के पेपर में पूरे 100 अंक प्राप्त किये थे। आदर्श ने साल 2014 में पटना के बीडी पब्लिक स्कूल से 94 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और उसके बाद जेईई एंट्रेंस की परीक्षा को पास कर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की की मेकैनिकल ब्रांच मेंदाख़िला पाया।
लेकिन मेकैनिकल इंजीनियरिंग में दाख़िला लेने वाले छात्र को सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनने की कैसे सूझी, इस बात को बड़े रोचक अन्दाज में साझा करते हुए आदर्श बताते हैंकि ”आईआईटी रुड़की में मुझे मेकैनिकल ब्रांच मिला जिसमें मेरी बहुत ज्यादा रूचि नहीं थी जैसे कि मुझे मैथ्स शुरुआत से ही पसंद था तो मैंने इससे जुड़ी चीजें एक्सप्लोर करना शुरु कर दिया। उस दौरान मुझे पता चला कि प्रोग्रामिंग वगैरह इससे ही जुड़ी होती है तो मैं वहां से अपनी रूचि के अनुसार सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के फील्ड में चला गया।”मैथ्स की पढ़ाई ने की काफी मददआदर्श को बचपन से ही मैथ्स की उलझनों को सुलझाना पसन्द था। उनका मानना है कि “गणित के अलग-अलग तरह के मुश्किल सवालों को हल करने के लिए अलग-अलग तरीके से सोचना पड़ता है। ऐसा करना मुझे हाई स्कूल के दिनों से ही पसंद है और इसी ने आगे चलकर मुझे सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनने में बहुत मदद की। यह रोज़मर्रा की जिंदगी में भी सही फैसले लेने में मेरी मदद करता है।”सीनियर ने किया प्रोत्साहित आदर्श आईआईटी रुड़की में इंजीनियरिंग के चौथे साल तक आते-आते प्रोग्रामिंग पर अपनी अच्छी पकड़बना चुके थे। उनकी प्रतिभा के दम पर कैंपस सेलेक्शन से वे एक कंपनी के लिए चुन भी लिए गए लेकिन इस बीच उनकी क़ाबिलियत पर नजर पड़ी उनके सीनियर हर्षिल शाह की जो गूगल में कार्यरत थे। वे आदर्श से मिले और उन्हें गूगल में नौकरी के लिए प्रोत्साहित किया।आदर्श बताते है कि ”हर्षिल सर ने मेरा यह कह कर हौसला बढ़ाया कि मेरे प्रोग्रामिंग स्किल्स इंटरव्यू पास करने के लिए काफी हैं।उनसे मिले उत्साहवर्धन के बाद मैंने गूगल में अप्लाई किया। इसके बाद लगभग दो महीने तक चले कई ऑनलाइन और हैदराबाद में हुए ऑन-साइट स्टेज टेस्ट से गुजरने के बाद मेरा गूगल में चयन हुआ।”
आदर्श के पिता बीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि ” हमारे परिवार के लिए गूगल की करोड़ रुपए पैकेज वाली नौकरी की खबर कोई अचानक से मिली खुशी की खबर की तरह नहीं थी क्योंकि जैसे-जैसे आदर्श एक-एक स्टेज पार करते हुए आगे बढ़ रहा था तो हमें उसकी सफलता का बहुत हद तक यकीन हो गया था ।
आदर्श 1 अगस्त से गूगल के म्यूनिख (जर्मनी) ऑफिस में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। उन्होंने इस साल अप्रैल में चीन के बीजिंग में हुए प्रोग्रामिंग कॉन्टेस्ट एसीएस-आईसीपीसी कॉम्पटिशन में भी हिस्सा लिया और दुनिया भर के सभी टीमों में हुई प्रतिस्पर्धा में भारत की आठटीमों में उनकी टीम को दूसरा स्थान मिला, जबकि दुनिया भर की 140 टीमों में उन्हें 56वां स्थान मिला। इंजीनियरिंग के आग्रहियों को सलाहअपने छोटे भाई सहित इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्रों को वे यही सलाह देते है कि”नौवीं-दसवीं के दौरान ही इंजीनियरिंग की तैयारी शुरु कर देनी चाहिए। इस दौरान सिलेबस का बोझ थोड़ा कम रहता है तो इसका फायदा उठाते हुए ग्यारहवीं-बारहवीं की पढ़ाई शुरु कर देनी चाहिए।”सच में आदर्श ने अपनी क़ाबिलियत के दम पर अपने आपको साबित किया और सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें ।
सौजन्य- kenifolis hindi
हौसले और मेहनत से मिलता है मुकाम आदर्श कुमार या उन जैसी प्रतिभाओं को देखकर लगता है कि जब हौसला बना लिया जाए ऊँची उड़ान का फिर तो फ़िजूल ही है कद देखना आसमान का। अगर लक्ष्य के प्रति निष्ठावान होकर आगे बढ़ा जाए तो सफलता के आसमां को छूने से कोई नहीं रोक सकता है, लेकिन सफलता की बुलंदियों तक पहुँचने का रास्ता मेहनत की पगडंडी से होकर ही गुजरता है। आदर्श मूल रूप से बिहार के पटना की बुद्धा कॉलोनी के निवासी हैं और उन्होंने IIT रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। लेकिन मेकैनिकल इंजीनियर की डिग्री लेने के बाद भी वह अपना करियर सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के तौर पर शुरू कर रहे हैं।प्रोग्रामिंग में शुरू से थी रुची बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाले आदर्श ने बारहवीं के मैथ्स और कैमिस्ट्री के पेपर में पूरे 100 अंक प्राप्त किये थे। आदर्श ने साल 2014 में पटना के बीडी पब्लिक स्कूल से 94 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और उसके बाद जेईई एंट्रेंस की परीक्षा को पास कर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की की मेकैनिकल ब्रांच मेंदाख़िला पाया।
लेकिन मेकैनिकल इंजीनियरिंग में दाख़िला लेने वाले छात्र को सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनने की कैसे सूझी, इस बात को बड़े रोचक अन्दाज में साझा करते हुए आदर्श बताते हैंकि ”आईआईटी रुड़की में मुझे मेकैनिकल ब्रांच मिला जिसमें मेरी बहुत ज्यादा रूचि नहीं थी जैसे कि मुझे मैथ्स शुरुआत से ही पसंद था तो मैंने इससे जुड़ी चीजें एक्सप्लोर करना शुरु कर दिया। उस दौरान मुझे पता चला कि प्रोग्रामिंग वगैरह इससे ही जुड़ी होती है तो मैं वहां से अपनी रूचि के अनुसार सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के फील्ड में चला गया।”मैथ्स की पढ़ाई ने की काफी मददआदर्श को बचपन से ही मैथ्स की उलझनों को सुलझाना पसन्द था। उनका मानना है कि “गणित के अलग-अलग तरह के मुश्किल सवालों को हल करने के लिए अलग-अलग तरीके से सोचना पड़ता है। ऐसा करना मुझे हाई स्कूल के दिनों से ही पसंद है और इसी ने आगे चलकर मुझे सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर बनने में बहुत मदद की। यह रोज़मर्रा की जिंदगी में भी सही फैसले लेने में मेरी मदद करता है।”सीनियर ने किया प्रोत्साहित आदर्श आईआईटी रुड़की में इंजीनियरिंग के चौथे साल तक आते-आते प्रोग्रामिंग पर अपनी अच्छी पकड़बना चुके थे। उनकी प्रतिभा के दम पर कैंपस सेलेक्शन से वे एक कंपनी के लिए चुन भी लिए गए लेकिन इस बीच उनकी क़ाबिलियत पर नजर पड़ी उनके सीनियर हर्षिल शाह की जो गूगल में कार्यरत थे। वे आदर्श से मिले और उन्हें गूगल में नौकरी के लिए प्रोत्साहित किया।आदर्श बताते है कि ”हर्षिल सर ने मेरा यह कह कर हौसला बढ़ाया कि मेरे प्रोग्रामिंग स्किल्स इंटरव्यू पास करने के लिए काफी हैं।उनसे मिले उत्साहवर्धन के बाद मैंने गूगल में अप्लाई किया। इसके बाद लगभग दो महीने तक चले कई ऑनलाइन और हैदराबाद में हुए ऑन-साइट स्टेज टेस्ट से गुजरने के बाद मेरा गूगल में चयन हुआ।”
आदर्श के पिता बीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि ” हमारे परिवार के लिए गूगल की करोड़ रुपए पैकेज वाली नौकरी की खबर कोई अचानक से मिली खुशी की खबर की तरह नहीं थी क्योंकि जैसे-जैसे आदर्श एक-एक स्टेज पार करते हुए आगे बढ़ रहा था तो हमें उसकी सफलता का बहुत हद तक यकीन हो गया था ।
आदर्श 1 अगस्त से गूगल के म्यूनिख (जर्मनी) ऑफिस में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे। उन्होंने इस साल अप्रैल में चीन के बीजिंग में हुए प्रोग्रामिंग कॉन्टेस्ट एसीएस-आईसीपीसी कॉम्पटिशन में भी हिस्सा लिया और दुनिया भर के सभी टीमों में हुई प्रतिस्पर्धा में भारत की आठटीमों में उनकी टीम को दूसरा स्थान मिला, जबकि दुनिया भर की 140 टीमों में उन्हें 56वां स्थान मिला। इंजीनियरिंग के आग्रहियों को सलाहअपने छोटे भाई सहित इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्रों को वे यही सलाह देते है कि”नौवीं-दसवीं के दौरान ही इंजीनियरिंग की तैयारी शुरु कर देनी चाहिए। इस दौरान सिलेबस का बोझ थोड़ा कम रहता है तो इसका फायदा उठाते हुए ग्यारहवीं-बारहवीं की पढ़ाई शुरु कर देनी चाहिए।”सच में आदर्श ने अपनी क़ाबिलियत के दम पर अपने आपको साबित किया और सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। आप अपनी प्रतिक्रिया नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते हैं और इस पोस्ट को शेयर अवश्य करें ।
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