संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत एच एस काॅलेज उदाकिशुनगंज के प्राचार्य डॉ विश्वनाथ विवेका ने प्रेस वार्ता कर कहा कि छात्र नेताओं के आरोप से मैं काफी मर्माहत और दुखी हूं। सच्चाई यह है विवि में कुलानुशासक के पद को त्याग कर एच एस काॅलेज को सजाने और संवारने की मंशा लेकर यहां आया था। लेकिन संसाधनों के अभाव में कॉलेज को संवारना मुश्किल लग रहा है।
उन्होंने कहा कि काॅलेज में वर्सर भी नहीं है । विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी यहां वर्सर हैं। काॅलेज का एक भी भवन पठन-पाठन के लायक नहीं है। इसके लिए विश्वविद्यालय से लगातार गुहार लगा रहा हूं । उन्होंने कहा कि जब निर्माण का कार्य यहां हुआ ही नहीं तो, लाखों की लूट का आरोप लगाना छात्रों को शोभा नहीं देता है। कॉलेज स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का आमंत्रण देती है। दूसरी और छात्र नेताओं को काॅलेज के जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी एवं अन्य विषयों के संदर्भ में प्राचार्य को सहयोग करना चाहिए। ऐसी स्थिति में छात्रों से कहना चाहता हूं प्राचार्य को हटाने के लिए आंदोलन करें। इसके लिए विगत 8 महीने से कुलपति से निवेदन कर रहा हूं। इस प्रकार गलत आरोप लगा कर मुझे अपमानित किया गया। छात्रों की ऐसी मानसिकता हो गई है कि वे विश्वविद्यालय और महाविद्यालय खुद चलाना चाहते हैं । इस तरह भविष्य में कुलपति और प्रधानाचार्य की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। परंतु अब कुलपति से निवेदन करूंगा कि किसी को यहां प्रभार देकर हमें प्राचार्य के पद से मुक्त करें।
बीएन मंडल विश्वविद्यालय अंतर्गत एच एस काॅलेज उदाकिशुनगंज के प्राचार्य डॉ विश्वनाथ विवेका ने प्रेस वार्ता कर कहा कि छात्र नेताओं के आरोप से मैं काफी मर्माहत और दुखी हूं। सच्चाई यह है विवि में कुलानुशासक के पद को त्याग कर एच एस काॅलेज को सजाने और संवारने की मंशा लेकर यहां आया था। लेकिन संसाधनों के अभाव में कॉलेज को संवारना मुश्किल लग रहा है।
उन्होंने कहा कि काॅलेज में वर्सर भी नहीं है । विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी यहां वर्सर हैं। काॅलेज का एक भी भवन पठन-पाठन के लायक नहीं है। इसके लिए विश्वविद्यालय से लगातार गुहार लगा रहा हूं । उन्होंने कहा कि जब निर्माण का कार्य यहां हुआ ही नहीं तो, लाखों की लूट का आरोप लगाना छात्रों को शोभा नहीं देता है। कॉलेज स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का आमंत्रण देती है। दूसरी और छात्र नेताओं को काॅलेज के जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी एवं अन्य विषयों के संदर्भ में प्राचार्य को सहयोग करना चाहिए। ऐसी स्थिति में छात्रों से कहना चाहता हूं प्राचार्य को हटाने के लिए आंदोलन करें। इसके लिए विगत 8 महीने से कुलपति से निवेदन कर रहा हूं। इस प्रकार गलत आरोप लगा कर मुझे अपमानित किया गया। छात्रों की ऐसी मानसिकता हो गई है कि वे विश्वविद्यालय और महाविद्यालय खुद चलाना चाहते हैं । इस तरह भविष्य में कुलपति और प्रधानाचार्य की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। परंतु अब कुलपति से निवेदन करूंगा कि किसी को यहां प्रभार देकर हमें प्राचार्य के पद से मुक्त करें।



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