संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ बनाने को लेकर कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय ने शनिवार को विद्वत परिषद की बैठक बुलाई है। विवि परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित बैठक में प्री-पीएचडी टेस्ट व पीएचडी की उपाधि प्राप्त शोधार्थियों को 5 प्वाइंट देने के अलावा विवि में बिना अनुमोदन के चल रहे पीजी विषयों का मुद्दा छाया रहेगा। ज्ञात हो कि वर्ष 2011 से बिना राज्य सरकार के अनुमोदन से 6 पीजी विषयों की पढ़ाई हो रही है। लेकिन इन 7 वर्षो में विवि स्तर पर राज्य सरकार में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया, ताकि विषयों का अनुमोदन मिल सके और राज्य सरकार यहां शिक्षकों के साथ कर्मियों के पद सृजित करें। अब इन विषयों की पढ़ाई में पेच फंस सकता है। हालांकि विवि ने इसे गंभीरता से लेते हुए विद्वत परिषद में विषयों के अनुमोदन के साथ पद सृजन को लेकर प्रयास करेगी।
बीएनएमयू में राज्य सरकार से बिना अनुमोदन के पीजी समाजशास्त्र विभाग, पीजी हिंदी, पीजी उर्दू, पीजी दर्शनशास्त्र, पीजी अंग्रेजी व गणित विभाग चल रहा है। इसके अलावा विवि में भौतिकी विज्ञान, रसायन शास्त्र, जूंत विज्ञान, वनस्पतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगौल, मनोविज्ञान विभाग को सरकार से अनुमोदन प्राप्त है। यूजीसी के 2009 रेगुलेशन के तहत पीएचडी की उपाधि प्राप्त शोधार्थियों को अलग-अलग बिंदूओं पर 5 प्वाइंट का प्रमाण पत्र देने का प्रावधान किया गया है। इसी के आधार पर पीएचडी धारक किसी विवि में सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते है। जब पीएचडी धारकों ने कुलपति से मिल कर अपनी बातों को प्रमुखता से उठाया और 5 प्वाइंट देने की मांग की तो विवि ने इसे गंभीरता से लिया है। लेकिन इसमें कई बाधाएं उत्पन्न हो रही है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए विद्वत परिषद में विचार विमर्श किया जाएगा।पड़ोसी देश नेपाल के साथ भारत सरकार ने यह समझौता किया था कि भारत के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले नेपाल के छात्रों को भारतीय छात्र की तरह माना जाए। अब बीएनएमयू में नामांकित नेपाल के छात्रों पर विवि यह निर्णय लेगी कि नेपाल के छात्रों को िवदेशी माना जाए या नहीं। अगर नहीं तो विद्वत परिषद यह तय करेगी कि नेपाल के छात्रों के साथ भारतीय छात्र जैसा विवि व्यवहार करेगी।
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ बनाने को लेकर कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय ने शनिवार को विद्वत परिषद की बैठक बुलाई है। विवि परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित बैठक में प्री-पीएचडी टेस्ट व पीएचडी की उपाधि प्राप्त शोधार्थियों को 5 प्वाइंट देने के अलावा विवि में बिना अनुमोदन के चल रहे पीजी विषयों का मुद्दा छाया रहेगा। ज्ञात हो कि वर्ष 2011 से बिना राज्य सरकार के अनुमोदन से 6 पीजी विषयों की पढ़ाई हो रही है। लेकिन इन 7 वर्षो में विवि स्तर पर राज्य सरकार में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया, ताकि विषयों का अनुमोदन मिल सके और राज्य सरकार यहां शिक्षकों के साथ कर्मियों के पद सृजित करें। अब इन विषयों की पढ़ाई में पेच फंस सकता है। हालांकि विवि ने इसे गंभीरता से लेते हुए विद्वत परिषद में विषयों के अनुमोदन के साथ पद सृजन को लेकर प्रयास करेगी।
बीएनएमयू में राज्य सरकार से बिना अनुमोदन के पीजी समाजशास्त्र विभाग, पीजी हिंदी, पीजी उर्दू, पीजी दर्शनशास्त्र, पीजी अंग्रेजी व गणित विभाग चल रहा है। इसके अलावा विवि में भौतिकी विज्ञान, रसायन शास्त्र, जूंत विज्ञान, वनस्पतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, भूगौल, मनोविज्ञान विभाग को सरकार से अनुमोदन प्राप्त है। यूजीसी के 2009 रेगुलेशन के तहत पीएचडी की उपाधि प्राप्त शोधार्थियों को अलग-अलग बिंदूओं पर 5 प्वाइंट का प्रमाण पत्र देने का प्रावधान किया गया है। इसी के आधार पर पीएचडी धारक किसी विवि में सहायक प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते है। जब पीएचडी धारकों ने कुलपति से मिल कर अपनी बातों को प्रमुखता से उठाया और 5 प्वाइंट देने की मांग की तो विवि ने इसे गंभीरता से लिया है। लेकिन इसमें कई बाधाएं उत्पन्न हो रही है। इन बाधाओं को दूर करने के लिए विद्वत परिषद में विचार विमर्श किया जाएगा।पड़ोसी देश नेपाल के साथ भारत सरकार ने यह समझौता किया था कि भारत के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले नेपाल के छात्रों को भारतीय छात्र की तरह माना जाए। अब बीएनएमयू में नामांकित नेपाल के छात्रों पर विवि यह निर्णय लेगी कि नेपाल के छात्रों को िवदेशी माना जाए या नहीं। अगर नहीं तो विद्वत परिषद यह तय करेगी कि नेपाल के छात्रों के साथ भारतीय छात्र जैसा विवि व्यवहार करेगी।



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