सुजीत मिश्रा, युवा लेखक
भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ दिया... सभी इस निर्णय पर खुश है और अपने अपने तरीके से इसे व्यक्त कर रहे है... पहले जब इस बेमेल गठबंधन पर प्रश्न उठते थे तो डिफेंड करते समय आतंकियों के लगातार खात्मे के आंकड़े दिखाकर विरोधियों को चुप करवाया जाता था... सबसे कड़ी परीक्षा कठुआ कांड के बाद आया था... उस समय पूरी जम्मू भाजपा इकाई सरकार गिरा देना चाहती थी इस हेतु उनलोगों ने अपने इस्तीफे तक जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष को दे दिया था... बाद में इसे मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर डैमेज कंट्रोल किया था... क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व के दिमाग मे कुछ और ही चल रहा था... दरअसल कश्मीर को लेकर विश्व मे एक नैरेटिव सेट था... कश्मीर में भारत ने जबरन कब्जा कर लिया है जिसका विरोध करने वालो को सेना द्वारा उत्पीड़ित किया जा रहा है ।
पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने पीडीपी के साथ सरकार चलाकर इस नैरेटिव को तोड़ा... मोदी की आक्रामक विदेशी दौरे और विश्व पटल पर पाकिस्तान को आतंकवाद की शरण स्थली के रूप में प्रचारित करवाया... रमजान में सिज़ फायर करके खुद को वार्ता का पक्षधर स्थापित करवाना रमजान के दौरान आतंकी गतिविधियां बढ़ने को विश्व मीडिया के समक्ष प्रचारित करवाया... आतंकियों से मुठभेड़ के समय आतंकियों को बचाने हेतु सेना पर पत्थरबाजी... isis के झंडे लहराना... पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे... इन सबने कश्मीर की आजादी की मांग का नैरेटिव जो कि अंतराष्ट्रीय जगत में सेट था को इस्लामी जेहादी आतंकवाद के रूप में बदल दिया... इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि रही महबूबा मुफ्ती का बयान जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो हो रहा है वह आज़ादी की लड़ाई नही है बल्कि इस्लाम की लड़ाई है.. यह कश्मीरियत की लड़ाई नही है बल्कि यहां इस्लाम के नाम पर खून खराबा हो रहा है, भारत भी कश्मीर में उसी तरह के इस्लामी आतंकवाद से जूझ रहा जिससे सीरिया, अफगानिस्तान या पाकिस्तान जूझ रहे... यह बयान भाजपा की कश्मीर नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि है... जो महबूबा और उसकी पार्टी अलगाव वादियों की हितैसी हुआ करती थी उसने इनको इस्लामी आतंकवाद से जोड़ दिया... जाहिर है महबूब के इस बयान के बाद भाजपा के लिए आतंकियों पर कार्यवाही की राह आसान हो गयी थी... साथ ही महबूबा की उपयोगिता भी नही रही... इसलिए मोदी-अमित शाह की भाजपा ने इसे किक मार दिया... अब कश्मीर में खुलकर खेलेगी मोदी सरकार... अलगावादियों और पत्थरबाजो कि गांव में पीतल भरते देखने का समय आ गया है... इन जिहादियों का सिम्पैथी लेने के तरीके की काट करके इस लड़ाई को अंजाम तक पहुचायेंगे निर्मोही 56" मोदी... !!
सुजीत मिश्रा, युवा लेखक
भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ दिया... सभी इस निर्णय पर खुश है और अपने अपने तरीके से इसे व्यक्त कर रहे है... पहले जब इस बेमेल गठबंधन पर प्रश्न उठते थे तो डिफेंड करते समय आतंकियों के लगातार खात्मे के आंकड़े दिखाकर विरोधियों को चुप करवाया जाता था... सबसे कड़ी परीक्षा कठुआ कांड के बाद आया था... उस समय पूरी जम्मू भाजपा इकाई सरकार गिरा देना चाहती थी इस हेतु उनलोगों ने अपने इस्तीफे तक जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष को दे दिया था... बाद में इसे मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर डैमेज कंट्रोल किया था... क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व के दिमाग मे कुछ और ही चल रहा था... दरअसल कश्मीर को लेकर विश्व मे एक नैरेटिव सेट था... कश्मीर में भारत ने जबरन कब्जा कर लिया है जिसका विरोध करने वालो को सेना द्वारा उत्पीड़ित किया जा रहा है ।
पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने पीडीपी के साथ सरकार चलाकर इस नैरेटिव को तोड़ा... मोदी की आक्रामक विदेशी दौरे और विश्व पटल पर पाकिस्तान को आतंकवाद की शरण स्थली के रूप में प्रचारित करवाया... रमजान में सिज़ फायर करके खुद को वार्ता का पक्षधर स्थापित करवाना रमजान के दौरान आतंकी गतिविधियां बढ़ने को विश्व मीडिया के समक्ष प्रचारित करवाया... आतंकियों से मुठभेड़ के समय आतंकियों को बचाने हेतु सेना पर पत्थरबाजी... isis के झंडे लहराना... पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे... इन सबने कश्मीर की आजादी की मांग का नैरेटिव जो कि अंतराष्ट्रीय जगत में सेट था को इस्लामी जेहादी आतंकवाद के रूप में बदल दिया... इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि रही महबूबा मुफ्ती का बयान जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो हो रहा है वह आज़ादी की लड़ाई नही है बल्कि इस्लाम की लड़ाई है.. यह कश्मीरियत की लड़ाई नही है बल्कि यहां इस्लाम के नाम पर खून खराबा हो रहा है, भारत भी कश्मीर में उसी तरह के इस्लामी आतंकवाद से जूझ रहा जिससे सीरिया, अफगानिस्तान या पाकिस्तान जूझ रहे... यह बयान भाजपा की कश्मीर नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि है... जो महबूबा और उसकी पार्टी अलगाव वादियों की हितैसी हुआ करती थी उसने इनको इस्लामी आतंकवाद से जोड़ दिया... जाहिर है महबूब के इस बयान के बाद भाजपा के लिए आतंकियों पर कार्यवाही की राह आसान हो गयी थी... साथ ही महबूबा की उपयोगिता भी नही रही... इसलिए मोदी-अमित शाह की भाजपा ने इसे किक मार दिया... अब कश्मीर में खुलकर खेलेगी मोदी सरकार... अलगावादियों और पत्थरबाजो कि गांव में पीतल भरते देखने का समय आ गया है... इन जिहादियों का सिम्पैथी लेने के तरीके की काट करके इस लड़ाई को अंजाम तक पहुचायेंगे निर्मोही 56" मोदी... !!
सुजीत मिश्रा, युवा लेखक




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें