संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित कुलपति कार्यालय में शुक्रवार को एक छात्रा ने हड़कंप मचा कर रख दिया। इस दौरान विवि परिसर में 3 घंटे तक चले हाई प्रोफाइल ड्रामा को भीड़ तमाशाबीन बन देखते रही। हालांकि शाम 4 बजे महिला थाना से पहुंची पुलिस ने छात्रा को हिरासत में लिया और उसे थाना लेकर चले गई। इस बीच विवि परिसर में अजीबो-गरीब हालात बनी रही। इससे पहले छात्रा ने कुलपति कार्यालय पहुंच कर पीजी में नामांकन के लिए 3 महीनें से दौरने की बात कही। छात्रा जब बोलते-बोलते जोर से चिल्लाने लगी तो लोगों को लगा कि वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। छात्रा ने असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए कुलपति कार्यालय के सामने िववि के शिक्षक व कर्मियों को गाली देने लगी। इस दौरान छात्रा ने पीजी विभाग के शिक्षकों पर कई गंभीर आरोप भी लगाई। हालात बिगड़ने पर कुलपति कार्यालय के दोनों गेट में ताला बंद कर पुलिस को सूचना दी गई। महिला पुलिस के पहुंचने के बाद छात्रा को विवि परिसर से बाहर निकाला गया। हालांकि छात्रा किसी से बात करने को तैयार नहीं थी।
मौके पर विवि प्रशासन ने महिला उत्पीड़न कोषांग की संयोजक प्रो. प्रज्ञा प्रसाद को छात्रा को समझाने का दायित्व सौंपा। बताया जाता है कि छात्रा ने प्रज्ञा प्रसाद को अपनी आपबीती सुनाई। इस बीच पहुंची महिला पुलिस थाना लेकर जाना चाह रही थी। लेकिन प्रो. प्रज्ञा प्रसाद ने उन्हें मना कर दिया। इस बात को लेकर परिसंपदा पदाधिकारी प्रो. शैलेंद्र कुमार और प्रो. प्रज्ञा प्रसाद के बीच नोकझोंक भी हुई। बताया जाता है कि लड़की सुपौल जिले की रहने वाली है। वह पिछले एक महीने से बीएनएमयू पीजी समाजशास्त्र विभाग में नामांकन के लिए आ रही थी। विवि के एक अधिकारी ने बताया कि नामांकन तिथि समाप्त होने के बाद भी उनके नामांकन के लिए विवि प्रशासन की ओर से आदेश गया। लेकिन वह नामांकन नहीं कराई। वह लगातार इसी तरह विवि पहुंचकर हंगामा कर रही थी। इससे विवि प्रशासन आजिज आ चुका था। जबकि कई छात्र सच्चाई यही बताते हैं कि छात्रा सच मे नामांकन के लिए विश्वविद्यालय में महीनों से दौर रही है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन दौरा रहे हैं ।
बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित कुलपति कार्यालय में शुक्रवार को एक छात्रा ने हड़कंप मचा कर रख दिया। इस दौरान विवि परिसर में 3 घंटे तक चले हाई प्रोफाइल ड्रामा को भीड़ तमाशाबीन बन देखते रही। हालांकि शाम 4 बजे महिला थाना से पहुंची पुलिस ने छात्रा को हिरासत में लिया और उसे थाना लेकर चले गई। इस बीच विवि परिसर में अजीबो-गरीब हालात बनी रही। इससे पहले छात्रा ने कुलपति कार्यालय पहुंच कर पीजी में नामांकन के लिए 3 महीनें से दौरने की बात कही। छात्रा जब बोलते-बोलते जोर से चिल्लाने लगी तो लोगों को लगा कि वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। छात्रा ने असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हुए कुलपति कार्यालय के सामने िववि के शिक्षक व कर्मियों को गाली देने लगी। इस दौरान छात्रा ने पीजी विभाग के शिक्षकों पर कई गंभीर आरोप भी लगाई। हालात बिगड़ने पर कुलपति कार्यालय के दोनों गेट में ताला बंद कर पुलिस को सूचना दी गई। महिला पुलिस के पहुंचने के बाद छात्रा को विवि परिसर से बाहर निकाला गया। हालांकि छात्रा किसी से बात करने को तैयार नहीं थी।
मौके पर विवि प्रशासन ने महिला उत्पीड़न कोषांग की संयोजक प्रो. प्रज्ञा प्रसाद को छात्रा को समझाने का दायित्व सौंपा। बताया जाता है कि छात्रा ने प्रज्ञा प्रसाद को अपनी आपबीती सुनाई। इस बीच पहुंची महिला पुलिस थाना लेकर जाना चाह रही थी। लेकिन प्रो. प्रज्ञा प्रसाद ने उन्हें मना कर दिया। इस बात को लेकर परिसंपदा पदाधिकारी प्रो. शैलेंद्र कुमार और प्रो. प्रज्ञा प्रसाद के बीच नोकझोंक भी हुई। बताया जाता है कि लड़की सुपौल जिले की रहने वाली है। वह पिछले एक महीने से बीएनएमयू पीजी समाजशास्त्र विभाग में नामांकन के लिए आ रही थी। विवि के एक अधिकारी ने बताया कि नामांकन तिथि समाप्त होने के बाद भी उनके नामांकन के लिए विवि प्रशासन की ओर से आदेश गया। लेकिन वह नामांकन नहीं कराई। वह लगातार इसी तरह विवि पहुंचकर हंगामा कर रही थी। इससे विवि प्रशासन आजिज आ चुका था। जबकि कई छात्र सच्चाई यही बताते हैं कि छात्रा सच मे नामांकन के लिए विश्वविद्यालय में महीनों से दौर रही है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन दौरा रहे हैं ।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें