सहरसा । आर एम कॉलेज सहरसा में प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर कल हुए भारी हंगामे के बाद आज पुनः संयुक्त छात्र संगठन के बैनर तले प्राचार्य के समर्थन में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन का शंखनाद किया गया । भारी प्रदर्शन, कॉलेज में तालाबंदी तथा विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला फूंककर सर्वदलीय छात्र संगठनों ने अपना आक्रोश जताया । इस अवसर पर एबीवीपी के विभाग संयोजक मुरारी कुमार मयंक व एमएलटी कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष नन्हे ने कहा कि बीएनएमयू के कुलपति व प्रति कुलपति महोदय पूरी तरह एक राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता की तरह कार्य कर रहे हैं ऐसा प्रतीत हो रहा है । हाल के दिनों में कई घटित घटना ने इस पर पूरी तरह स्पष्टता भी दिखा दिया है ।
बीएनएमयू द्वारा कराए गए छात्र संघ चुनाव में चाहे एस एन एस कॉलेज सहरसा, आर एम लॉ कॉलेज, बी एस एस कॉलेज सुपौल, टीपी कॉलेज मधेपुरा, पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया चुनाव को लेकर भारी धांधली का मामला हो एक संगठन को पूरी तरह स्पष्ट करता है कि कुलपति व प्रतिकुलपति महोदय पूरी तरह एक पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं । बीएसएस कॉलेज सुपौल में फर्स्ट मजिस्ट्रेट से सभी उम्मीदवारों के नामांकन के लिए एफिडेविट देना था लेकिन एक संगठन के सभी उम्मीदवारों ने नोटरी पब्लिक से एफिडेविट बना कर दिया । जो पूरी तरह अवैध थी और सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होना चाहिए था लेकिन राजनेताओं के दबाव में कुलपति महोदय व प्रति कुलपति महोदय ने नामांकन को ही कैंसिल कर नए सिरे से नामांकन लेकर उस संगठन के सभी उम्मीदवारों को योग्य घोषित कर दिया । दूसरी और आरएम लॉ कॉलेज में एक कर्मचारी द्वारा उसी कॉलेज में छात्र भी, कर्मचारी भी, एक संगठन के समर्थक व प्रचार भी करना तथा चुनाव कार्य में भी लगाना कई प्रकार के संदेह उत्पन्न करता है । कई शिकायत पत्र देने के बावजूद भी किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई दूसरी और केंद्रीय पैनल के चुनाव में जिस प्रकार एक संगठन को मदद करने की पूरी तरह कोशिश की गई वह काफी शर्मनाक है । एनएसयूआई के अमित कन्हैया ने कहा कि आरएम कॉलेज का जो मामला है वह पूरी तरह से शर्मनाक है आरएम कॉलेज में प्रॉक्टर के बेटे का B.Ed में नामांकन कम अंक होने के बाद भी प्रति कुलपति महोदय के आदेश पर प्राचार्य द्वारा गलत तरीके से नामांकन नहीं लेने पर प्रॉक्टर द्वारा जिस प्रकार प्राचार्य के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज व मारपीट को अंजाम दिया गया वह पूरी तरह शर्मनाक घटना शिक्षक-छात्र समाज के लिए है । जिसे वीडियो वायरल होने के बाद पूरे समाज के लोगों ने देखा भी लेकिन प्रॉक्टर के एक पार्टी से जुड़े होने के कारण कुलपति महोदय और प्रति कुलपति महोदय ने मारपीट गाली गलौज के शिकार व ईमानदारी से कार्य करने वाले प्राचार्य पर ही उल्टा कार्रवाई कर दिया गया ।बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे । इससे पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि बीएनएमयू के कुलपति व प्रतिकुलपति पूरी तरह स्थानीय राजनेताओं के दबाव में दोषी व्यक्ति को बचाकर ईमानदारी से कार्य करने वाले लोगों का गला घोट रहे हैं । B.Ed नामांकन में फर्जीवाड़ा बहुत बड़ा स्कैम है जिसमें विश्वविद्यालय के कई बड़े पदाधिकारियों का सीधे तरीके से हाथ है । टीपी कॉलेज B.Ed नमांकन फर्जीवाड़ा पर विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत से दोषियों को बचाने की चाल सबके सामने है जहां एक वरीय शिक्षक द्वारा अपने रिलेशन की एक छात्रा को सामान्य श्रेणी में होने के बावजूद भी गलत तरीके से अनुसूचित जाति की श्रेणी में नामांकन कर दिया गया । जिसमें बड़े पैमाने पर पैसों का खेल हुआ । एबीवीपी ने इसका खुलासा पूरे तथ्य और सबूत के साथ कुलपति महोदय को मार्च में ही किया लेकिन अभी तक कुलपति महोदय और प्रति कुलपति महोदय द्वारा ऐसे दलाल, भ्रष्टों को बचाने की कोशिश पूरी तरह जारी है । आखिर विश्वविद्यालय को किस ओर ले जाना चाहते हैं जहां दलालों और भ्रष्टाचारी को बचाकर ईमानदारों को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है । यदि जल्द ही आरएम कॉलेज के प्राचार्य को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो गलत प्रकार से दोषी करार दिया गया है इसे वापस लेकर प्राचार्य बनाया जाए । अन्यथा यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी । इस अवसर पर दर्जनों छात्र उपस्थित थे
बीएनएमयू द्वारा कराए गए छात्र संघ चुनाव में चाहे एस एन एस कॉलेज सहरसा, आर एम लॉ कॉलेज, बी एस एस कॉलेज सुपौल, टीपी कॉलेज मधेपुरा, पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया चुनाव को लेकर भारी धांधली का मामला हो एक संगठन को पूरी तरह स्पष्ट करता है कि कुलपति व प्रतिकुलपति महोदय पूरी तरह एक पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं । बीएसएस कॉलेज सुपौल में फर्स्ट मजिस्ट्रेट से सभी उम्मीदवारों के नामांकन के लिए एफिडेविट देना था लेकिन एक संगठन के सभी उम्मीदवारों ने नोटरी पब्लिक से एफिडेविट बना कर दिया । जो पूरी तरह अवैध थी और सभी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द होना चाहिए था लेकिन राजनेताओं के दबाव में कुलपति महोदय व प्रति कुलपति महोदय ने नामांकन को ही कैंसिल कर नए सिरे से नामांकन लेकर उस संगठन के सभी उम्मीदवारों को योग्य घोषित कर दिया । दूसरी और आरएम लॉ कॉलेज में एक कर्मचारी द्वारा उसी कॉलेज में छात्र भी, कर्मचारी भी, एक संगठन के समर्थक व प्रचार भी करना तथा चुनाव कार्य में भी लगाना कई प्रकार के संदेह उत्पन्न करता है । कई शिकायत पत्र देने के बावजूद भी किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई दूसरी और केंद्रीय पैनल के चुनाव में जिस प्रकार एक संगठन को मदद करने की पूरी तरह कोशिश की गई वह काफी शर्मनाक है । एनएसयूआई के अमित कन्हैया ने कहा कि आरएम कॉलेज का जो मामला है वह पूरी तरह से शर्मनाक है आरएम कॉलेज में प्रॉक्टर के बेटे का B.Ed में नामांकन कम अंक होने के बाद भी प्रति कुलपति महोदय के आदेश पर प्राचार्य द्वारा गलत तरीके से नामांकन नहीं लेने पर प्रॉक्टर द्वारा जिस प्रकार प्राचार्य के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज व मारपीट को अंजाम दिया गया वह पूरी तरह शर्मनाक घटना शिक्षक-छात्र समाज के लिए है । जिसे वीडियो वायरल होने के बाद पूरे समाज के लोगों ने देखा भी लेकिन प्रॉक्टर के एक पार्टी से जुड़े होने के कारण कुलपति महोदय और प्रति कुलपति महोदय ने मारपीट गाली गलौज के शिकार व ईमानदारी से कार्य करने वाले प्राचार्य पर ही उल्टा कार्रवाई कर दिया गया ।बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे । इससे पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि बीएनएमयू के कुलपति व प्रतिकुलपति पूरी तरह स्थानीय राजनेताओं के दबाव में दोषी व्यक्ति को बचाकर ईमानदारी से कार्य करने वाले लोगों का गला घोट रहे हैं । B.Ed नामांकन में फर्जीवाड़ा बहुत बड़ा स्कैम है जिसमें विश्वविद्यालय के कई बड़े पदाधिकारियों का सीधे तरीके से हाथ है । टीपी कॉलेज B.Ed नमांकन फर्जीवाड़ा पर विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत से दोषियों को बचाने की चाल सबके सामने है जहां एक वरीय शिक्षक द्वारा अपने रिलेशन की एक छात्रा को सामान्य श्रेणी में होने के बावजूद भी गलत तरीके से अनुसूचित जाति की श्रेणी में नामांकन कर दिया गया । जिसमें बड़े पैमाने पर पैसों का खेल हुआ । एबीवीपी ने इसका खुलासा पूरे तथ्य और सबूत के साथ कुलपति महोदय को मार्च में ही किया लेकिन अभी तक कुलपति महोदय और प्रति कुलपति महोदय द्वारा ऐसे दलाल, भ्रष्टों को बचाने की कोशिश पूरी तरह जारी है । आखिर विश्वविद्यालय को किस ओर ले जाना चाहते हैं जहां दलालों और भ्रष्टाचारी को बचाकर ईमानदारों को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है । यदि जल्द ही आरएम कॉलेज के प्राचार्य को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो गलत प्रकार से दोषी करार दिया गया है इसे वापस लेकर प्राचार्य बनाया जाए । अन्यथा यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी । इस अवसर पर दर्जनों छात्र उपस्थित थे



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