संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में प्रोन्नति से वंचित शिक्षकों ने आंदोलन का मन बना लिया है। इस बाबत शिक्षक प्रोन्नति संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि मंडल ने डीएसडब्ल्यू डॉ योगेंद्र प्रसाद यादव को आवेदन देते हुए अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं होने पर 28 मई से विवि में धरना-प्रदर्शन करते हुए अनशन शुरू किया जाएगा। मौके पर प्रोन्नति संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. अशोक कुमार, सिनेट सदस्य प्रो. अरविंद कुमार, डॉ. शैलेश्वर प्रसाद, डॉ. विपिन कुमार सिंह, डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1986-87 में नियुक्त शिक्षकों में से बहुत ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें अभी तक एक भी प्रोन्नति नहीं मिली है। बिना प्रोन्नति लाभ लिए ही कई शिक्षकों की मौत हो चुकी है। शिक्षक नेताओं ने कहा है कि विवि में वर्षों पूर्व से एकरूपता और पारदर्शिता के अभाव में सैंकड़ों शिक्षक प्रोन्नति से वंचित हैं।
वहीं डीएसडब्ल्यू डॉ. योगेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि प्रोन्नति कार्य में पूर्व के अवरोधकों को शीघ्र दूर कर शिक्षकों की प्रोन्नति का कार्य शुरू किया गया है। जल्द ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को प्रोन्नति दी जाएगी। मौके पर डॉ मो. अमानुल्लाह, डॉ सुदर्शन कुमार सिंह, डॉ विमल कुमार सिंह, डॉ अनिल कुमार सिंह, डॉ इंद्रकांत झा, डॉ अरुण कुमार, डॉ मिथिलेश कुमार, डॉ अमोद नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।शिक्षकों ने कहा कि विवि द्वारा दिसंबर 2017 से फरवरी 2018 तक स्क्रीनिंग का कार्य संपन्न कराया तो गया लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी सलेक्शन कमेटी का गठन नहीं किया जा सका जिससे कि उसकी अनुशंसा की जा सके। ऐसी स्थिति में प्रोन्नति से वंचित शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों ने कहा कि 30-35 सालों तक सेवा के उपरांत भी प्रोन्नति नहीं मिलना दुखद है। जबकि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में ऐसी समस्याएं नहीं है। शिक्षकों ने कहा हाईकोर्ट ने भी प्रोन्नति से संबंधित आवेदकों को 2 माह में नियमानुसार प्रोन्नति देने की कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगों के निष्पादन के लिए सलेक्शन कमेटी का गठन अविलंंब किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति को रोकना भारतीय संविधान का उल्लंघन है।
बीएन मंडल विश्वविद्यालय में प्रोन्नति से वंचित शिक्षकों ने आंदोलन का मन बना लिया है। इस बाबत शिक्षक प्रोन्नति संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि मंडल ने डीएसडब्ल्यू डॉ योगेंद्र प्रसाद यादव को आवेदन देते हुए अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं होने पर 28 मई से विवि में धरना-प्रदर्शन करते हुए अनशन शुरू किया जाएगा। मौके पर प्रोन्नति संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. अशोक कुमार, सिनेट सदस्य प्रो. अरविंद कुमार, डॉ. शैलेश्वर प्रसाद, डॉ. विपिन कुमार सिंह, डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि वर्ष 1986-87 में नियुक्त शिक्षकों में से बहुत ऐसे शिक्षक हैं जिन्हें अभी तक एक भी प्रोन्नति नहीं मिली है। बिना प्रोन्नति लाभ लिए ही कई शिक्षकों की मौत हो चुकी है। शिक्षक नेताओं ने कहा है कि विवि में वर्षों पूर्व से एकरूपता और पारदर्शिता के अभाव में सैंकड़ों शिक्षक प्रोन्नति से वंचित हैं।
वहीं डीएसडब्ल्यू डॉ. योगेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि प्रोन्नति कार्य में पूर्व के अवरोधकों को शीघ्र दूर कर शिक्षकों की प्रोन्नति का कार्य शुरू किया गया है। जल्द ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को प्रोन्नति दी जाएगी। मौके पर डॉ मो. अमानुल्लाह, डॉ सुदर्शन कुमार सिंह, डॉ विमल कुमार सिंह, डॉ अनिल कुमार सिंह, डॉ इंद्रकांत झा, डॉ अरुण कुमार, डॉ मिथिलेश कुमार, डॉ अमोद नारायण सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।शिक्षकों ने कहा कि विवि द्वारा दिसंबर 2017 से फरवरी 2018 तक स्क्रीनिंग का कार्य संपन्न कराया तो गया लेकिन 3 महीने बीत जाने के बाद भी सलेक्शन कमेटी का गठन नहीं किया जा सका जिससे कि उसकी अनुशंसा की जा सके। ऐसी स्थिति में प्रोन्नति से वंचित शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों ने कहा कि 30-35 सालों तक सेवा के उपरांत भी प्रोन्नति नहीं मिलना दुखद है। जबकि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में ऐसी समस्याएं नहीं है। शिक्षकों ने कहा हाईकोर्ट ने भी प्रोन्नति से संबंधित आवेदकों को 2 माह में नियमानुसार प्रोन्नति देने की कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगों के निष्पादन के लिए सलेक्शन कमेटी का गठन अविलंंब किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति को रोकना भारतीय संविधान का उल्लंघन है।



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