संपादक- आर. कुमार
बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में शनिवार को आयोजित विद्वत परिषद की बैठक में छात्र हित को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय ने परिषद के सदस्यों को जवाबदेही का एहसास कराते हुए कहा कि विवि में शैक्षणिक माहौल बनाने की जिम्मेवारी विभागाध्यक्षों के साथ शिक्षकों की भी है। इससे पहले बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विभागों में 3 से 4 वोकेशनल खोले जाए। मौके पर कुलपति ने पीजी विभागाध्यक्ष को रोजगारोन्मुखी कोर्स के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे विवि में छात्र लाभांवित होंगे और उनके लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। वहीं बैठक में यूजीसी से संचालित मॉक के तहत विभिन्न विषयों में ऑनलाइन कोर्स शुरू करने पर सहमति प्रदान की गई। वहीं पीएस कॉलेज मधेपुरा, कॉमर्स कॉलेज मधेपुरा व वीरपुर कॉलेज में बीसीए, बीबीए सहित अन्य वोकेशनल कोर्स को शुरू करने की हरी झंडी दी गई। बैठक का संचालन करते हुए कुलसचिव डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव व उपकुलसचिव शैक्षणिक डॉ एमआई रहमान ने एजेंडों पर सदस्यों के सवालों का जवाब दिया। बैठक में प्रोवीसी प्रो डॉ फारूक अली, डीएन डॉ शिवमुनी यदव, पीजी हेड डॉ अरूण कुमार मिश्र, डॉ आरकेपी रमण, डॉ पीएस सिंह, डॉ भवानंद मिश्र, डॉ एचएलएस जौहरी, प्राचार्य डॉ राजीव सिन्हा, डॉ किशोर कुमार, डॉ केएस ओझा, डॉ रेणु सिंह, डॉ अनिलकांत मिश्रा, मेंबर डॉ देवनारायण साह, एकेडमिक सहायक बिमल कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
बैठक में पीएचडी डिग्री धारकों को 5 बिंदुओं पर आधारित योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त देने पर चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि यूजीसी के 2016 रेगुलेशन के तहत सभी अर्हता को पूरा करने वाले पीएचडी धारकों को प्रमाण पत्र दिया जा सकता है। इसके लिए पीजी विभागाध्यक्षों को अधिकृत किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि पीएचडी कोर्स काके हर हाल में रेगुलेशन मोड में करना होगा। साथ ही कहा गया कि यदि शोधार्थी किसी संस्थान में कार्यरत हैं तो उन्हें शोध कार्य के लिए अध्ययन अवकाश लेना अनिवार्य होगा। बैठक में निर्णय गया कि जो शोधार्थी 2011-12 में पीआरटी उत्तीर्ण हो चुके है लेकिन उन्होंने कोर्स वर्क पूरा नहीं किया है अब उन्हें मौका नहीं दिया जाएगा। ऐसे शोधार्थियों को फिर से पीआरटी पास करना होगा। बैठक में कहा गया कि पीएचडी अवार्ड होने के 30 दिनों के अंदर यूजीसी के इंट्लीपनेट पर अपलोड करना अनिर्वाय है। इस दौरान निर्णय लिया गया कि विवि में जल्द से जल्द सामान्य परिनियम 2016 पर आधारित प्री-पीएचडी टेस्ट कराया जाए। साथ ही पीजीआरसी की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बीएनएमयू में नामांकित या नामांकन लेने वाले नेपाल के छात्रों को भारतीय छात्र की तरह हर सुविधा प्रदान की जाएगी। बैठक में नेपाल के छात्रों को िवदेशी नहीं गया और नेपाल के छात्र से भारतीय छात्र जैसा विवि व्यवहार करने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि नेपाली छात्रों को विवि में लगने वाला हर शुल्क एक समान लगेगा। विवि में बिना अनुमोदन के लिए चल रहे 6 विषयों में पद सृजन को लेकर एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। कमेटी की जवाबदेही तय करते हुए कहा गया कि राज्य सरकार से अनुमोदन के साथ पद सृजन के लिए कमेटी रिपोर्ट तैयार कर विवि को सौंपेगी। वहीं विवि राज्य सरकार में रिपोर्ट समर्पित कर विभागों को अनुमोदन दिलाने का हरसंभव प्रयास करेगी। वहीं विश्वविद्यालय के शिक्षकों को रिफ्रेसर या ओरिएंटेशन कोर्स के लिए ड्यूटी लिव के बदले यूजीसी नियम के अनुसार ऑन ड्यूटी लिव देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा बैठक में विभागाध्यक्षों द्वारा समर्पित विषय विशेषज्ञों की सूची को अनुमोदित किया गया। कहा गया कि इन विषय विशेषज्ञों से विवि में शैक्षणिक कार्य लिए जाऐंगे।
बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में शनिवार को आयोजित विद्वत परिषद की बैठक में छात्र हित को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो डॉ अवध किशोर राय ने परिषद के सदस्यों को जवाबदेही का एहसास कराते हुए कहा कि विवि में शैक्षणिक माहौल बनाने की जिम्मेवारी विभागाध्यक्षों के साथ शिक्षकों की भी है। इससे पहले बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विभागों में 3 से 4 वोकेशनल खोले जाए। मौके पर कुलपति ने पीजी विभागाध्यक्ष को रोजगारोन्मुखी कोर्स के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे विवि में छात्र लाभांवित होंगे और उनके लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। वहीं बैठक में यूजीसी से संचालित मॉक के तहत विभिन्न विषयों में ऑनलाइन कोर्स शुरू करने पर सहमति प्रदान की गई। वहीं पीएस कॉलेज मधेपुरा, कॉमर्स कॉलेज मधेपुरा व वीरपुर कॉलेज में बीसीए, बीबीए सहित अन्य वोकेशनल कोर्स को शुरू करने की हरी झंडी दी गई। बैठक का संचालन करते हुए कुलसचिव डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव व उपकुलसचिव शैक्षणिक डॉ एमआई रहमान ने एजेंडों पर सदस्यों के सवालों का जवाब दिया। बैठक में प्रोवीसी प्रो डॉ फारूक अली, डीएन डॉ शिवमुनी यदव, पीजी हेड डॉ अरूण कुमार मिश्र, डॉ आरकेपी रमण, डॉ पीएस सिंह, डॉ भवानंद मिश्र, डॉ एचएलएस जौहरी, प्राचार्य डॉ राजीव सिन्हा, डॉ किशोर कुमार, डॉ केएस ओझा, डॉ रेणु सिंह, डॉ अनिलकांत मिश्रा, मेंबर डॉ देवनारायण साह, एकेडमिक सहायक बिमल कुमार सहित अन्य मौजूद थे।
बैठक में पीएचडी डिग्री धारकों को 5 बिंदुओं पर आधारित योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त देने पर चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि यूजीसी के 2016 रेगुलेशन के तहत सभी अर्हता को पूरा करने वाले पीएचडी धारकों को प्रमाण पत्र दिया जा सकता है। इसके लिए पीजी विभागाध्यक्षों को अधिकृत किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि पीएचडी कोर्स काके हर हाल में रेगुलेशन मोड में करना होगा। साथ ही कहा गया कि यदि शोधार्थी किसी संस्थान में कार्यरत हैं तो उन्हें शोध कार्य के लिए अध्ययन अवकाश लेना अनिवार्य होगा। बैठक में निर्णय गया कि जो शोधार्थी 2011-12 में पीआरटी उत्तीर्ण हो चुके है लेकिन उन्होंने कोर्स वर्क पूरा नहीं किया है अब उन्हें मौका नहीं दिया जाएगा। ऐसे शोधार्थियों को फिर से पीआरटी पास करना होगा। बैठक में कहा गया कि पीएचडी अवार्ड होने के 30 दिनों के अंदर यूजीसी के इंट्लीपनेट पर अपलोड करना अनिर्वाय है। इस दौरान निर्णय लिया गया कि विवि में जल्द से जल्द सामान्य परिनियम 2016 पर आधारित प्री-पीएचडी टेस्ट कराया जाए। साथ ही पीजीआरसी की बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि बीएनएमयू में नामांकित या नामांकन लेने वाले नेपाल के छात्रों को भारतीय छात्र की तरह हर सुविधा प्रदान की जाएगी। बैठक में नेपाल के छात्रों को िवदेशी नहीं गया और नेपाल के छात्र से भारतीय छात्र जैसा विवि व्यवहार करने का निर्णय लिया गया। कहा गया कि नेपाली छात्रों को विवि में लगने वाला हर शुल्क एक समान लगेगा। विवि में बिना अनुमोदन के लिए चल रहे 6 विषयों में पद सृजन को लेकर एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया। कमेटी की जवाबदेही तय करते हुए कहा गया कि राज्य सरकार से अनुमोदन के साथ पद सृजन के लिए कमेटी रिपोर्ट तैयार कर विवि को सौंपेगी। वहीं विवि राज्य सरकार में रिपोर्ट समर्पित कर विभागों को अनुमोदन दिलाने का हरसंभव प्रयास करेगी। वहीं विश्वविद्यालय के शिक्षकों को रिफ्रेसर या ओरिएंटेशन कोर्स के लिए ड्यूटी लिव के बदले यूजीसी नियम के अनुसार ऑन ड्यूटी लिव देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा बैठक में विभागाध्यक्षों द्वारा समर्पित विषय विशेषज्ञों की सूची को अनुमोदित किया गया। कहा गया कि इन विषय विशेषज्ञों से विवि में शैक्षणिक कार्य लिए जाऐंगे।



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