● Sarang Tanay@Madhepura.
मधेपुरा/बिहार: केंद्रीय विद्यालय(सेंट्रल स्कूल) में अब सांसदों के 10 कोटे के अलावा किसी नेता या मंत्री की सिफारिश पर बच्चों के एडमिशन नहीं हो पाएंगे। केंद्र सरकार ने सेंट्रल स्कूलों में शिक्षा मंत्रालय का कोटा खत्म करने का फैसला लिया है। अब सिर्फ सांसदों के पास ही अपने क्षेत्र में 10 एडमिशन कराने का अधिकार बचा है। अब केंद्र सरकार ने सेंट्रल स्कूलों में एडमिशन में सांसदों के अलावा बांकी सब कोटा खत्म करने का फैसला किया है। यानि, अब सेंट्रल एजुकेशन मिनिस्टर के पास भी बतौर सांसद ही 10 कोटा बचेगा, उनके मंत्रालय को मिला भारी - भरकम कोटा छीन लिया गया है।
इस फैसले की जानकारी सांसदों को दी जा रही है ताकि वह 10 बच्चों के अलावा और किसी एडमिशन के लिए शिक्षा मंत्रालय में सिफारिश ना भेजें। लोकसभा में सांसद अपने लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सेंट्रल स्कूलों में अधिकतम 10 बच्चों के एडमिशन की सिफारिश कर सकते हैं। इसी तरह राज्यसभा सांसद अपने राज्य के किसी भी सेंट्रल स्कूल में अधिकतम 10 बच्चों का एडमिशन करा सकते हैं।
मालूम हो कि पहले सांसदों को यह कोटा 6 एडमिशन का ही होता था,जिसे 2016-17 में बढ़ाकर 10 कर दिया गया। इस कोटे के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री 450 एडमिशन की सिफारिश कर सकते थे। ये सिफारिशें भी वही होती थी जो किसी नेता या सांसद के जरिये मंत्रालय तक आती थी।
वैसे यह 450 की लिमिट कभी रही नहीं और हर सेशन में इससे कहीं ज्यादा एडमिशन मंत्रालय की सिफारिश पर सेंट्रल स्कूलों में होते रहे।
सेशन 2018-19 में 8 हजार से ज्यादा एडमिशन मंत्रालय की सिफारिश पर किए गए। इन सिफारिशों में ज्यादातर गरीब और जरूरतमंद बच्चे ही शामिल होते थे, जिनका सेंट्रल स्कूल में एडमिशन के लिए लोकल नेता या सांसद मंत्रालय में सिफारिश करते थे। अब यह कोटा नहीं रहेगा।
मधेपुरा में बीएन मंडल यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, स्टेडियम, स्लीपर फैक्ट्री, इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना आदि है,
यहाँ बस सेंट्रल स्कूल नहीं है, स्थानीय निवासी कई बार अपने सांसद से इसकी मांग कर चुके हैं।
मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र भी है, राजनीतिक मानचित्र पर इसकी एक अलग पहचान है।।।


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